बिहार में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं अपहरण और फिरौती के मामलों में, दो पदाधिकारियों समेत चार कर्मियों को किया गया गिरफ्तार, आरोपियों के पास से डेढ़ लाख रुपये की फिरौती राशि भी बरामद
By एस पी सिन्हा | Updated: April 25, 2026 15:53 IST2026-04-25T15:53:35+5:302026-04-25T15:53:35+5:30
गिरफ्तार आरोपियों के पास से डेढ़ लाख रुपये की फिरौती राशि भी बरामद की गई है। इनमें पकरीबरावां उत्पाद थाना के दो एएसआई सुजीत कुमार और दिलीप कुमार सहित दो होमगार्ड जवान शामिल हैं। यह मामला कौआकोल थाना क्षेत्र के महुलिया टांड़ का है।

बिहार में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं अपहरण और फिरौती के मामलों में, दो पदाधिकारियों समेत चार कर्मियों को किया गया गिरफ्तार, आरोपियों के पास से डेढ़ लाख रुपये की फिरौती राशि भी बरामद
पटना: बिहार में जब रक्षक ही बन जाये भक्षक तो ऐसे में सुशासन पर सवाल उठना तो लाजमी ही है। इस बीच पुलिसकर्मियों के अपहरण और फिरौती के मामलों में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। दरअसल, सूबे के जमुई जिले में पुलिस ने अपहरण और फिरौती से जुड़े एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा करते हुए नवादा उत्पाद विभाग के दो पदाधिकारियों समेत चार कर्मियों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से डेढ़ लाख रुपये की फिरौती राशि भी बरामद की गई है। इनमें पकरीबरावां उत्पाद थाना के दो एएसआई सुजीत कुमार और दिलीप कुमार सहित दो होमगार्ड जवान शामिल हैं। यह मामला कौआकोल थाना क्षेत्र के महुलिया टांड़ का है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात चारों उत्पाद कर्मी वहां वाहन जांच कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक क्रेटा कार में सवार तीन लोगों को पकड़ा और उन्हें पकरीबरावां थाने ले गए। बताया गया कि तीनों युवक शराब के नशे में थे। इधर, तीनों पकड़े गए लोगों में से एक संतोष कुमार ने अपने भाई को फोन से सूचना दिया कि उसे अगवा कर लिया गया है। पांच लाख रुपये लेकर नवादा आ जाओ।
इस बीच संतोष के भाई जमुई के नर्वदा गांव के पिंटू कुमार ने जमुई थाने में लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई कि उसके बड़े भाई संतोष कुमार घर से क्रेटा लेकर निकले थे। परंतु वापस नहीं लौटे हैं। उन्हें किसी ने अगवा कर लिया है। इस बीच वादी अपने साला राहुल कुमार एवं चचेरा भाई मनीष को लेकर दो लाख रुपयों के साथ नवादा पहुंचा और पकरीबरावां उत्पाद थाने में क्रेटा गाड़ी छोड़ने के एवज में डेढ़ लाख रुपये दिया।
इधर, अपहरण व फिरौती मामले में जमुई नगर थाना कांड संख्या 193/26 दर्ज कर जमुई पुलिस पकरीबरावां उत्पाद थाने पहुंची और एएसआई दिलीप कुमार के घर से डेढ़ लाख रुपये बरामद कर लिया। क्रेटा गाड़ी भी बरामद कर ली गई। इसके बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया गया और जमुई थाने लाया गया। जमुई पुलिस द्वारा रिलीज जारी कर मामले की जानकारी दी गई।
इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जिस पुलिस पर आम जनता की सुरक्षा और अपराधियों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी होती है, उसी पुलिस के कुछ कर्मियों के कथित रूप से अपहरण जैसे संगीन अपराध में शामिल होने की बात सामने आई है। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि जनता के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाता है।
उल्लेखनीय है कि हालिया मामलों में, दो दरोगा सहित चार लोगों को डेढ़ लाख रुपये की फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सूबे के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने भी दावा किया था कि राज्य के कुख्यात 'किडनैपिंग कल्चर' की शुरुआत एक पुलिस अधिकारी (आईपीएस) द्वारा शुरू कराई गई थी। उन्होंने ऑन रिकॉर्ड दावा किया कि बिहार में अपहरण की शुरुआत एक आईपीएस अधिकारी के कारण हुई। उनका यह बयान पुलिस व्यवस्था और पुराने सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि सच्चाई है। गुप्तेश्वर पांडेय के मुताबिक कई पुराने पुलिस अधिकारी भी इस तथ्य से परिचित हैं। उन्होंने बेतिया के तत्कालीन एसपी रहे एक आईपीएस पर आरोप लगाया कि उस दौर में अपराधियों से समझौते किए गए। पैसे वाले लोगों को टारगेट कर अपहरण की घटनाएं बढ़ाईं गईं।
इसके बाद फिरौती लेकर उन्हें छोड़ने की ‘प्रथा’ शुरू हुई। यह व्यवस्था धीरे-धीरे संगठित अपराध में बदल गई। इसी को उन्होंने बिहार में ‘किडनैपिंग कल्चर’ की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों को खुली छूट मिली हुई थी। ‘पैसे वालों को पकड़ो और छोड़ो’ जैसा मॉडल चलाया गया। इससे अपराधियों का मनोबल लगातार बढ़ता गया।
गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद हालात बदले। सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। अपहरण जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। धीरे-धीरे इस अपराध पर नियंत्रण पाया गया। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही कहा कि अब ऐसी संस्कृति काफी हद तक खत्म हो चुकी है।