बिहार सत्ता हस्तांतरणः आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को दिल्ली बुलाया, 15-20 अधिकारी पर केंद्र की नजर?
By एस पी सिन्हा | Updated: April 14, 2026 14:47 IST2026-04-14T14:45:56+5:302026-04-14T14:47:22+5:30
Bihar power transfer: अनुपम कुमार मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में नीतीश कुमार के सबसे विश्वसनीय रणनीतिकारों में शुमार रहे हैं।

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पटनाः बिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर जारी उल्टी गिनती के बीच नौकरशाही के गलियारों में भी जबर्दस्त हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बीच बिहार कैडर के कई प्रभावशाली आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को अचानक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला लिया गया है। केंद्र के द्वारा जारी पहली सूची में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों के नाम भी शामिल है। सबसे चौंकाने वाला नाम 2003 बैच के आईएएस अधिकारी अनुपम कुमार का है। अनुपम कुमार मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में नीतीश कुमार के सबसे विश्वसनीय रणनीतिकारों में शुमार रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुपम कुमार को केंद्र में ऊर्जा मंत्रालय का संयुक्त सचिव बनाया गया है। उनके साथ ही उनकी पत्नी प्रतिमा एस. वर्मा को भी जनजातीय कार्य मंत्रालय में कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई है। एक साथ ‘पावर कपल’ का दिल्ली जाना इस बात का संकेत है कि बिहार सचिवालय का पुराना दबदबा अब पूरी तरह बदलने वाला है।
इसके साथ ही वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश राठी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, बिहार में समाज कल्याण विभाग की प्रधान सचिव वंदना प्रेयसी को फर्टिलाइजर विभाग और श्रवनन एम. को अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी मिली है।
जानकारों का मानना है कि नई सरकार के गठन से ठीक पहले इन अधिकारियों का राज्य से जाना भविष्य की नई प्रशासनिक कार्यशैली का हिस्सा है। ऐसे में पटना के मुख्य सचिवालय में इस वक्त सन्नाटा पसरा हुआ है और हर अधिकारी की नजर आने वाली दूसरी सूची पर टिकी है। चर्चा है कि जल्द ही आधा दर्जन और बड़े नामों को दिल्ली भेजा जा सकता है।
राज्य सरकार ने पहले ही इन अधिकारियों को रिलीव करने की फाइल पर अपनी मुहर लगा दी थी। जानकारों की मानें तो नई सरकार आने से पहले पुराने तंत्र को बदलकर नए अधिकारियों को मौका देना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। जानकार इसे महज रूटीन ट्रांसफर नहीं बल्कि ‘सिस्टम रीसेट’ के तौर पर देख रहे हैं।
नई सरकार के गठन से पहले अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारियों को केंद्र भेजना इस बात का इशारा माना जा रहा है कि आने वाला प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह नए चेहरों और नई कार्यशैली के साथ काम करेगा। सियासी नजरिए से देखें तो यह कदम सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के साथ ‘कंट्रोल और कमांड’ की नई रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
नई सरकार अपने भरोसेमंद अफसरों के साथ काम करना चाहती है, ताकि फैसलों की रफ्तार और असर दोनों पर उसका पूरी तरह से नियंत्रण हो। कहा जा रहा है कि नई सरकार बनने के साथ ही कई अहम पदों पर नए आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। यह बदलाव केवल ट्रांसफर-तबादले तक सीमित नहीं होगा, बल्कि प्रशासनिक ढांचे की नई दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक उनके केंद्र सरकार में जाने की संभावना प्रबल है और उन्हें नीति आयोग में सदस्य बनाए जाने की चर्चा तेज़ है। बता दें कि दीपक कुमार 2021 से संविदा पर कार्यरत हैं और इससे पहले 2018 से 2021 तक राज्य के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं।
उनका प्रशासनिक अनुभव इस संभावित नई भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। इसी के साथ सचिव अनुपम कुमार और ओएसडी गोपाल सिंह को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की सहमति बनती नजर आ रही है।
अगर यह फैसला अंतिम रूप लेता है तो बिहार प्रशासन से कई अनुभवी चेहरे दिल्ली की नौकरशाही में अपनी भूमिका निभाते दिखाई देंगे। इस तरह से बिहार में जहां एक तरफ नई सरकार के गठन की राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ नौकरशाही में होने वाला यह संभावित बदलाव आने वाले दिनों में प्रशासनिक इतिहास का एक अहम अध्याय साबित हो सकता है।