15 साल बाद भी AIESL एमआरओ में जेन-एक्स शॉप तैयार नहीं, बोइंग 787 के इंजनों के सुधार के लिए आवश्यक है ये शॉप

By वसीम क़ुरैशी | Updated: May 16, 2026 20:51 IST2026-05-16T20:51:14+5:302026-05-16T20:51:24+5:30

जनवरी 2022 में एयर इंडिया को टाटा समूह ने ले लिया. इसके साथ ही विस्तारा का भी टाटा एयर इंडिया में विलय हो गया. इस एयरलाइंस के बेड़े में शामिल बोइंग 787 के इंजन के सुधार के लिए ये आवश्यक है. लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी एआईईएसएल इसे पूरी तरह तैयार ही नहीं कर पाई.

Even after 15 years, the Gen-X shop at the AIESL MRO remains unfinished; this facility is essential for the repair of Boeing 787 engines | 15 साल बाद भी AIESL एमआरओ में जेन-एक्स शॉप तैयार नहीं, बोइंग 787 के इंजनों के सुधार के लिए आवश्यक है ये शॉप

15 साल बाद भी AIESL एमआरओ में जेन-एक्स शॉप तैयार नहीं, बोइंग 787 के इंजनों के सुधार के लिए आवश्यक है ये शॉप

नागपुर : भारी विलंब के बाद हाल ही में एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण की राहें आसान हुईं हैं. इसके साथ ही अब इस साल के अंत तक उड़ानें बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं. नागपुर से उड़ान बढ़ने का मतलब यहां के एमआरओ को अधिक व्यवसाय मिलने की संभावना भी है. लेकिन देश में सबसे बड़ी एमआरओ फैसिलिटी रखने वाली एआई इंजीनियरिंग सर्विसेस लिमिटेड (एआईईएसएल) के नागपुर एमआरओ में बोइंग 787 के इंजनों के रखरखाव के लिए 15 साल बाद भी जेन-एक्स शॉप का काम अधूरा पड़ा है. 

जनवरी 2022 में एयर इंडिया को टाटा समूह ने ले लिया. इसके साथ ही विस्तारा का भी टाटा एयर इंडिया में विलय हो गया. इस एयरलाइंस के बेड़े में शामिल बोइंग 787 के इंजन के सुधार के लिए ये आवश्यक है. लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी एआईईएसएल इसे पूरी तरह तैयार ही नहीं कर पाई. उल्लेखनीय है कि इससे पहले एआईईएसएल, एयर इंडिया की ही सब्सिडेरी कंपनी थी.

सूत्रों के अनुसार बी 787 के जेन-एक्स इंजन जनलर इलेक्ट्रिक कंपनी (जीई) तैयार करती है. एयर इंडिया के निजीकरण के पहले इन इंजनों की मरम्मत व रखरखाव का करार एआईईएसएल के साथ था लेकिन निजीकरण के बाद ‘जीई’ ने खुद ही इनकी ओवरहॉलिंग का काम शुरू कर दिया. 

स्थितियां दर्शा रहीं हैं कि एआईईएसएल को बेहतर प्रबंधन के साथ ज्यादा प्रोफेशनलिज्म के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है. कुवैत एयरवेज के अलावा नागपुर एमआरओ ने शायद ही किसी और विदेशी एयरलाइंस के साथ करार किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि नागपुर एमआरओ का व्यवसाय बढ़ाने के लिए आखिर कोई प्लानिंग क्यों नहीं हो रही है?

एमआरओ का अब तक का सफर

-2010 के पूर्व एयर इंडिया द्वारा 100 बोइंग विमान खरीदे जाने के एवज में बोइंग कंपनी ने मिहान-सेज में 50 एकड़ की जमीन पर एमआरओ तैयार किया. इसका निर्माण लार्सन एंड टर्बाे (एलएंडटी) ने किया था.

-तैयार होने के बाद जनवरी 2011 से यह नियमित रूप से संचालित हो गया. शुरूआत में इसका नाम बोइंग एयर इंडिया एमआरओ था.

-विदेशी इंजीनियरों व तकनीशियनों को यहां रखरकर काम करवाना बोइंग के लिए बेहद खर्चिला हो रहा था. इसलिए 2014 में ये पूर्णत: एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेस लिमिटेड के सुपूर्द कर दिया गया. इसके बाद ये एयर इंडिया एमआरओ के रूप से संचालित रहा.

-जनवरी 2022 के बाद एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेस लिमिटेड के नाम में से एयर इंडिया का नाम हट गया और इसका केवल शॉर्ट फार्म ‘एआई’ ही सामने रह गया.

-बताया जा रहा है कि जल्द ही इस कंपनी का भी निजीकरण होगा.

-एआईईएसएल के नागपुर एमआरओ में करीब 300 इंजीनियर, तकनीशियन सहित कुछ अप्रेंटिस कार्यरत है. इस एमआरओ ने अब तक करीब 200 विमानों का रखरखाव किया है.

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