उत्तर बिहार की लाइफलाइनः विक्रमशिला सेतु ने ली गंगा नदी में समाधि, उत्तर और दक्षिण बिहार का टूट गया संपर्क?

By एस पी सिन्हा | Updated: May 4, 2026 13:42 IST2026-05-04T13:40:53+5:302026-05-04T13:42:02+5:30

Lifeline of North Bihar: बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विक्रमशिला सेतु का जो स्पैन गिरा है।

Lifeline of North Bihar Vikramshila Bridge sinks in River Ganga, connection between North and South Bihar lost? | उत्तर बिहार की लाइफलाइनः विक्रमशिला सेतु ने ली गंगा नदी में समाधि, उत्तर और दक्षिण बिहार का टूट गया संपर्क?

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Highlightsहताहत की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को तत्काल मौके पर बुलाया गया।आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पानी के अंदर कोई भी वाहन या व्यक्ति नहीं पाया गया है।

भागलपुरः उत्तर बिहार की लाइफलाइन कहा जाने वाला भागलपुर का विक्रमशिला सेतु रविवार की देर रात करीब 1:10 बजे गंगा नदी में समा गया। सेतु का पिलर नंबर 133 के पास का करीब 25 मीटर लंबा स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया। इसके बाद से उत्तर और दक्षिण बिहार का आपस में संपर्क टूट गया है। इस घटना के तुरंत बाद हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता और लोगों के बीच फैल रही आशंकाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। गंगा की लहरों के नीचे किसी भी संभावित हताहत की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को तत्काल मौके पर बुलाया गया।

एसडीआरएफ के गोताखोरों ने पानी के अंदर काफी देर तक गहन सर्च ऑपरेशन चलाया। बताया जाता है कि जांच के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नदी में केवल गिरा हुआ स्लैब मिला है। स्लैब के अलावा कुछ नहीं मिला जिला प्रशासन ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पानी के अंदर कोई भी वाहन या व्यक्ति नहीं पाया गया है।

सर्च ऑपरेशन में किसी भी प्रकार की जनहानि या वाहन के गिरने की बात महज एक अफवाह साबित हुई है। फिलहाल सेतु पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क है और स्लैब गिरने के कारणों की जांच की जा रही है। इसबीच बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विक्रमशिला सेतु का जो स्पैन गिरा है।

उसे दुरुस्त करने में तीन महीने का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल दिसंबर तक विक्रमशिला सेतु के सामानांतर गंगा नदी पर बन रहे पुल पर वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। डॉ. चंद्रशेखर ने विक्रमशिला पुल के धंसने के बाद भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा बरती गई सतर्कता की तारीफ़ करते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन सतर्क नहीं होता तो यह हादसा बहुत बड़ा हो सकता था।

इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुल निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस पुल पर यातायात का भारी दबाव था। पिछले दिनों पटना से एक टीम को इस पुल की जांच के लिए भेजा गया था और जांच में भी इस पुल की कई खामियां सामने आई थी।

उन्होंने कहा कि इस पुल की मरम्मती में आईआईटी, पटना का भी सहयोग लिया जाएगा। डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि जैसे ही इस दुर्घटना की जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मिली, उन्होंने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क करके बॉर्डर रोड निगम से भी पुल की मरम्मती में मदद मांगी है। रक्षा मंत्री ने उन्हें हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है।

वहीं, इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा है। तेजस्वी ने कहा कि अब भ्रष्ट एनडीए सरकार के सौजन्य से भागलपुर में विक्रमशिला पुल ने गंगा नदी में समाधि ले ली। भ्रष्टाचार का इससे भी बड़ा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण चाहिए। उन्होंने कहा कि विगत महीने हम लोगों ने सरकार को आगाह किया था कि यह पुल गिर सकता है,

लेकिन आदतन सरकार ने अपनी भ्रष्ट व्यवस्था का बचाव करते हुए पल्ला झाड़ लिया। जिस वक्त पुल गिरा अनेक वाहन पुल पर थे, लेकिन ईश्वर का आशीर्वाद रहा कि गिरने वाले स्लैब पर नहीं थे, इसलिए जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। विगत दो साल में बिहार में 100 से अधिक पुल-पुलिया गिरे हैं, तभी तो बिहार भ्रष्टाचार में शीर्ष पर है।

उधर, पुल के धंसने के बाद सड़क मार्ग बंद होने का सीधा असर अब गंगा किनारे बसे घाटों पर दिखने लगा है, जहां अगुवानी सुल्तानगंज फेरी सेवा यात्रियों के दबाव से जूझ रही है। स्थिति यह है कि खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित अगुवानी घाट से लेकर सुल्तानगंज तक नावों और फेरी सेवा पर यात्रियों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है।

सुबह और शाम के समय घाटों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगह हालात ऐसे हैं कि नाव में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह फेरी सेवा लंबे समय से निजी स्तर पर संचालित हो रही है, लेकिन विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद अचानक यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जिससे व्यवस्था पूरी तरह दबाव में आ गई है। छोटे-छोटे नाविकों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

साफ तौर पर प्रशासन से मांग की है कि इस आपात स्थिति को गंभीरता से लिया जाए। यात्रियों का कहना है कि घाटों पर अतिरिक्त नावों की व्यवस्था की जाए, सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती हो। इसके साथ ही रोशनी, शेड और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी महसूस की जा रही है।

घाटों पर बढ़ती अव्यवस्था को देखकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। बता दें कि इस घटना के कारण सीमांचल सहित लगभग 16 जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है और करीब एक लाख लोगों का रोजाना आवागमन बाधित हुआ है।

पिछले दस वर्षों में इस पुल की तीन बार मरम्मत हो चुकी है। विक्रमशिला सेतु का निर्माण 1990 के दशक में शुरू हुआ था और जुलाई 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में इसका उद्घाटन किया गया था। उस समय बिहार में राजद की सरकार थी. लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे पुल के निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपा गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस दौर में इसके निर्माण पर लगभग 838 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

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