कौन थे रघु राय?, 1984 भोपाल गैस त्रासदी की वो तस्वीरें?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 26, 2026 11:40 IST2026-04-26T11:39:52+5:302026-04-26T11:40:52+5:30

पंजाब प्रांत के झांग शहर में (अब पाकिस्तान में) 18 दिसंबर 1942 को जन्मे राय ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन 23 साल की उम्र में उन्होंने कैमरा थाम लिया और 1966 में ‘द स्टेट्समैन’ अखबार के मुख्य छायाकार बन गए।

Raghu Rai renowned photographer passes away 83 prolonged illness Bangladesh refugee crisis of 1972 or Bhopal gas tragedy of 1984 | कौन थे रघु राय?, 1984 भोपाल गैस त्रासदी की वो तस्वीरें?

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Highlights पत्नी गुरमीत, बेटे नितिन और तीन बेटियां—लगन, अवनि और पूर्वाई हैं।अंतिम संस्कार रविवार शाम चार बजे लोधी श्मशान में किया जाएगा। भारतीय इतिहास के कुछ सबसे मर्मस्पर्शी पलों को अपने कैमरे में कैद किया।

नई दिल्लीः भारत के विविध रूपों को अपने कैमरे में कैद करने वाले देश के प्रख्यात छायाकारों में से एक रघु राय का रविवार तड़के यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। रघु राय के बेटे एवं छायाकार नितिन राय ने कहा, ‘‘पिताजी को दो साल पहले प्रोस्टेट कैंसर हुआ था, लेकिन बाद में उन्हें राहत मिलने लगी थी। फिर कैंसर पेट तक फैल गया, जो ठीक हो गया। हाल में यह मस्तिष्क तक पहुंच गया था और उन्हें उम्र संबंधी अन्य तकलीफें भी थीं।’’ रघु राय के परिवार में उनकी पत्नी गुरमीत, बेटे नितिन और तीन बेटियां—लगन, अवनि और पूर्वाई हैं।

उनका अंतिम संस्कार रविवार शाम चार बजे लोधी श्मशान में किया जाएगा। पंजाब प्रांत के झांग शहर में (अब पाकिस्तान में) 18 दिसंबर 1942 को जन्मे राय ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन 23 साल की उम्र में उन्होंने कैमरा थाम लिया और 1966 में ‘द स्टेट्समैन’ अखबार के मुख्य छायाकार बन गए।

उसके बाद के छह दशक किसी धुंधली स्मृति की तरह नहीं गुजरे बल्कि हर पल दर्ज होता रहा। रघु राय का कैमरा भारत के सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल का मूक गवाह बनता रहा। मशहूर फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन के शागिर्द रहे रघु राय ने भारतीय इतिहास के कुछ सबसे मर्मस्पर्शी पलों को अपने कैमरे में कैद किया।

फिर चाहे वह 1972 का बांग्लादेश शरणार्थी संकट हो या 1984 की भोपाल गैस त्रासदी। उन्होंने इंदिरा गांधी, दलाई लामा, मदर टेरेसा, सत्यजीत रे, हरिप्रसाद चौरसिया और बिस्मिल्ला खां जैसी प्रमुख हस्तियों की तस्वीरों के माध्यम से भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक रंगों को इस तरह कैद किया जिसने उनके जीवन को एक बिल्कुल नए स्वरूप में पेश किया और उनके अनछुए पहलुओं को दर्शाया।

रोजमर्रा की सुर्खियों से कहीं आगे, रघु राय के कैमरे ने आम आदमी और साधारण जीवन को उतनी ही, बल्कि उससे भी अधिक संजीदगी एवं गहराई के साथ दर्ज किया। उनके फ्रेम में साधारण भी असाधारण बन उठता था, मानो अक्सर इन श्वेत-श्याम तस्वीरों में वह जीवन की कठोरता को कम करना चाहते हों।

अपने लंबे करियर में उन्होंने ‘संडे’ और ‘इंडिया टुडे’ जैसी प्रमुख भारतीय पत्रिकाओं के साथ काम किया। ‘टाइम’, ‘लाइफ’, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘द इंडिपेंडेंट’ और ‘द न्यू यॉर्कर’ जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में उनके फोटो निबंध छपे। वर्ष 1977 में कार्टियर-ब्रेसन की सिफारिश पर वह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी संस्था ‘मैग्नम फोटोज’ के सदस्य बने।

‘वर्ल्ड प्रेस फोटो’ की जूरी में तीन बार और यूनेस्को की अंतरराष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता की जूरी में दो बार उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। सम्मान एवं पुरस्कारों की बात करें तो 1972 में बांग्लादेश युद्ध की कवरेज और उसके बाद कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके राय को ‘पद्मश्री’ से भी नवाजा गया।

‘नेशनल ज्योग्राफिक’ में प्रकाशित उनके फोटो निबंध ‘ह्यूमन मैनेजमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ इन इंडिया’ के लिए उन्हें अमेरिका में ‘फोटोग्राफर ऑफ द ईयर’ का खिताब मिला। फ्रांस सरकार ने 2009 में उन्हें अपने प्रतिष्ठित सम्मान ‘ऑफिसर डेस आर्ट्स एट डेस लेट्रेस’ से विभूषित किया।

रघु राय ने कई महत्वपूर्ण किताबें भी लिखीं, जिनमें ‘रघु रायज इंडिया: रिफ्लेक्शन्स इन कलर एंड रिफ्लेक्शन्स इन ब्लैक एंड व्हाइट’ और ‘एक्सपोज़र: पोर्ट्रेट ऑफ ए कॉरपोरेट क्राइम’ प्रमुख हैं। 2010 में स्थापित रघु राय फाउंडेशन उनकी 50,000 से अधिक तस्वीरों को संजोए हुए है। वह अपनी 57वीं किताब पर काम कर रहे थे।

Web Title: Raghu Rai renowned photographer passes away 83 prolonged illness Bangladesh refugee crisis of 1972 or Bhopal gas tragedy of 1984

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