पंजाब में संदीप पाठक के खिलाफ मुकदमा, आम आदमी पार्टी-भाजपा में रार तेज, जानें घटनाक्रम?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 2, 2026 21:37 IST2026-05-02T21:36:07+5:302026-05-02T21:37:24+5:30

आप को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल- ने पार्टी के सिद्धांतों, मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी।

rs mp Sandeep Pathak in Punjab Case filed against conflict Aam Aadmi Party and BJP intensifies know developments | पंजाब में संदीप पाठक के खिलाफ मुकदमा, आम आदमी पार्टी-भाजपा में रार तेज, जानें घटनाक्रम?

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Highlightsसंवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं।पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।पिछले महीने ‘आप’ छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे।

चंडीगढ़ः आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने प्राथमिकियां दर्ज की हैं। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। हालांकि, प्राथमिकी के बारे में अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली गई लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही पाठक एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार होकर अपने घर से निकल चुके थे। वीडियो में पाठक अपने घर से निकलते हुए दिख रहे हैं और कुछ संवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं।

दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व प्रोफेसर पाठक को आम आदमी पार्टी (आप) की चुनाव एवं प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। कभी ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यह घटनाक्रम 30 अप्रैल को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ट्राइडेंट लिमिटेड के परिसर पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद सामने आया है। राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता इस कंपनी के मानद चेयरमैन हैं। गुप्ता उन सात सांसदों में से एक हैं जिन्होंने पिछले महीने ‘आप’ छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे।

इससे पहले पंजाब पुलिस ने सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी। आप को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल- ने पार्टी के सिद्धांतों, मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी।

भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से निर्वाचित हुए हैं। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर सातों सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी, जिससे उच्च सदन में आप के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई। पंजाब के भाजपा नेताओं ने भी पाठक के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा की।

भाजपा की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आप पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों को आपके नेता कुछ दिन पहले तक अपना चहेता कह रहे थे, आज जैसे ही वे पार्टी बदलते हैं, उनमें खामियां दिखने लगती हैं। क्या यह आम आदमी पार्टी के दोहरे मापदंड का सबूत नहीं है?’’

जाखड़ से जब बाद में प्राथमिकी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास फिलहाल मामलों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने भी पाठक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की आलोचना करते हुए इसे ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार राज्य पुलिस का दुरुपयोग ‘‘राजनीतिक हथियार’’ के रूप में कर रही है।

शर्मा ने पंजाबी भाषा में किये गए एक पोस्ट में आरोप लगाया, ‘‘राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब में उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में दर्ज प्राथमिकी से स्पष्ट होता है कि केजरीवाल और मान द्वारा पुलिस को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह महज एक प्राथमिकी नहीं है। यह भय, दहशत और प्रतिशोध की राजनीति है।’’ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने ‘आप’ पर आरोप लगाया कि वह पार्टी से मतभेद रखने वालों को ‘‘चुनिंदा रूप से निशाना बना रही है’’। मजीठिया ने सवाल किया, ‘‘ संदीप पाठक कभी प्रमुख सत्ता केंद्र भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी थे।

अगर वह तब गलत थे, तो वह अपने ‘बॉस’ अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान का अनुसरण कर रहे थे। तो फिर उनके साथ कौन मिलीभगत कर रहा था, और उन्हें अब क्यों नहीं पकड़ा जा रहा है?’’ भाजपा ने आरोप लगाया गया कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई गलत प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पंजाब पुलिस पाठक के आवास पर गई और छापेमारी की कोशिश की। हम पूछना चाहते हैं कि क्या कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि पुलिस मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ है,लेकिन उसका इस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है?’’

त्रिवेदी ने केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जो लोग एक नयी तरह की राजनीति करने का दावा करते हैं, उन्हें यह समझाना चाहिए कि उनके राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से कैसे ध्वस्त हो गई है।’’ पंजाब के विपक्षी दलों ने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री मान शराब के नशे में आए थे।

इस आरोप का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने आम आदमी पार्टी (आप)सरकार पर शासन बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आम आदमी पार्टी, पंजाब सरकार और विशेष रूप से केजरीवाल से स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह एक खोखला दिखावा है।’’

भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि केजरीवाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निपटाने के लिए पंजाब पुलिस का दुरुपयोग कर रहे हैं, और मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इसमें भागीदार बन गए हैं।

पूनावाला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘संदीप पाठक के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जो हाल ही तक आप के राज्यसभा सदस्य और पार्टी महासचिव (संगठन) थे। हैरानी की बात यह है कि अरविंद केजरीवाल भगवंत मान की मिलीभगत से बेशर्मी से बदले की राजनीति कर रहे हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘स्पष्ट है कि यह केजरीवाल द्वारा प्रतिशोध की राजनीति के तहत किया गया है, जो बेहद प्रतिशोधी और द्वेषपूर्ण हैं। इस तरह के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए वे पंजाब पुलिस का दुरुपयोग करते हैं।’’ पूनावाला ने प्राथमिकी दर्ज करने के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘अगर ये मामले शुरू से मौजूद थे, तो प्राथमिकी पहले क्यों दर्ज नहीं की गईं?

अगर वह भ्रष्ट थे, तो उन्हें इतने लंबे समय तक पार्टी में क्यों रखा गया, खासकर तब जब वह (संगठन के) महासचिव थे? क्या पिछले कुछ दिनों में कोई नई जानकारी सामने आई है, या कथित भ्रष्टाचार अभी हुआ है?’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल को राजनीतिक विरोधियों और असंतुष्टों को निशाना बनाने की ‘‘पुरानी आदत’’ है।

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