कुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता?, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों के पास आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा?

By सतीश कुमार सिंह | Updated: May 19, 2026 11:28 IST2026-05-19T11:21:32+5:302026-05-19T11:28:20+5:30

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों के पास आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा, कहा कि कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है।

Supreme Court Can't Ignore Dog Bites Says Strays Removed From Streets Upholds Stray Dog Removal Order Near Schools & Hospitals, Says Dog Bite Menace Rising | कुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता?, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों के पास आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा?

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों आदि जैसे सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने नवंबर 2025 के आदेश में संशोधन करने से इनकार कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार में कुत्तों के हमलों से भयमुक्त होकर स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है। 

आज जारी किए गए निर्देश-

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पशु-जननांग नियंत्रण नियमों को लागू करना होगा।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले में कम से कम एक पशु-जननांग केंद्र स्थापित करना होगा।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को रेबीज रोधी टीकों और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

इन निर्देशों को लागू करने के लिए बाध्य अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

अर्थात्, उनके खिलाफ सामान्यतः कोई पुलिस मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए उनके कर्तव्य पालन के दौरान।

कुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों के पास आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा, कहा कि कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 25 नवंबर के अपने उस आदेश को बदलने से इनकार कर दिया, जिसमें स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं जैसे संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि टीकाकरण/नसबंदी के बाद उन्हें वापस इन क्षेत्रों में न छोड़ने का निर्देश प्रभावी रहेगा।

नवंबर 2025 में क्या हुआ?

पिछले साल अदालत ने अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे कि वे आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों जैसे अस्पताल, पार्क, रेलवे स्टेशन आदि से हटाकर आश्रय स्थलों में ले जाएं। अदालत ने फैसला सुनाया कि इन कुत्तों को एक बार नसबंदी हो जाने के बाद उन क्षेत्रों में नहीं छोड़ा जा सकता, जहां वे पाए गए थे। अदालत ने निर्धारित क्षेत्रों को छोड़कर सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया।

ये आदेश विवादित साबित हुए, जिसके चलते कई कुत्ता प्रेमियों और पशु अधिकार संगठनों ने इन्हें रद्द करने के लिए याचिकाएं दायर कीं। इनमें से कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद, अदालत ने जनवरी में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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