86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन, लखनऊ में चौथी बार?, सभी विधानसभा अध्यक्ष जुटेंगे, होंगे कई फैसले

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 18, 2026 18:00 IST2026-01-18T17:42:39+5:302026-01-18T18:00:51+5:30

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश इस मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे.

up sarkar 86th All India Presiding Officers Conference in Lucknow 4th time All Assembly Speakers gather many decisions taken | 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन, लखनऊ में चौथी बार?, सभी विधानसभा अध्यक्ष जुटेंगे, होंगे कई फैसले

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Highlightsसम्मेलन के समापन सत्र को 21 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे.सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी.विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना आयोजन की मेजबानी करेंगे.

लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार से देश के सबसे बड़े विधायी आयोजन शुरुआत हो रही है. 19 से 21 जनवरी तक होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी और विधानसभाओं/विधान परिषदों के सचिवों का 62 वां सम्मेलन होगा. इनमें देश की सभी विधानसभाओं के अध्यक्ष और पीठासीन तथा विधानसभाओं और विधानपरिषदों के सचिव, वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना आयोजन की मेजबानी करेंगे. सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश इस मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे. सम्मेलन के समापन सत्र को 21 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे.

यूपी में चौथी बार हो रहा यह आयोजन

सतीश महाना के अनुसार, इन सम्मेलनों में देशभर से आए पीठासीन अधिकारी, सचिवगण एवं गणमान्य प्रतिनिधि विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं, सदन संचालन, सुशासन तथा समसामयिक विधायी विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करेंगे. विधानमंडलीय परंपरा के अनुसार यह सम्मेलन हर वर्ष किसी न किसी राज्य में आयोजित किया जाता है.

पिछली बार इसकी मेजबानी कर्नाटक ने की थी. उत्तर प्रदेश में यह सम्मेलन चौथी बार आयोजित हो रहा है. इससे पहले वर्ष 2015 में प्रदेश को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी.इस बार 19 जनवरी को सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन विधान भवन, लखनऊ में होगा. उद्घाटन सत्र में संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा.

विभिन्न समितियों की बैठकें होंगी. देश भर की विधानसभा और विधान परिषद सचिवों का एक अलग सम्मेलन भी होगा. जिसमें बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक परिवेश में विधानमंडलीय सचिवों की भूमिका, डिजिटल प्रक्रियाएं और कार्यप्रणाली में सुधार जैसे विषयों पर मंथन किया जाएगा.

अयोध्या भी जाएंगे प्रतिभागी

20 जनवरी को पूर्ण सत्र के दौरान एजेंडा बिंदुओं पर गहन चर्चा की जाएगी. इसके साथ ही मुख्य सम्मेलन सत्र में पीठासीन अधिकारियों के स्तर पर विधायी संस्थाओं की भूमिका, कार्यकुशलता, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा.

जबकि 21 जनवरी को समापन सत्र में विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों के संबोधन होंगे. सम्मेलन के दौरान विधायी परंपराओं, संसदीय नवाचारों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित किया जाएगा.सम्मेलन के उपरांत 22 जनवरी प्रतिभागियों के लिए अयोध्या धाम भ्रमण के लिए ले जाया जाएगा. जो प्रतिभागी वाराणसी जाना चाहेंगे,

उन्हे वहां ले जाया जाएगा. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का दावा है कि यह सम्मेलन संसदीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान तथा विधायी संस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा.

योगी सरकार ने विधानसभा सत्र कम समय चला

यूपी की राजधानी लखनऊ में तीन दिनों तक विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं, सदन संचालन, सुशासन तथा समसामयिक विधायी विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श भले ही हो, लेकिन बीते पांच वर्षों से प्रदेश में विधानसभा सत्र 25 दिनों से कम ही चला हैं. वर्ष 2020 में कोविड महामारी के कारण 16 दिन ही विधान सत्र चला था.

वर्ष 2021 में 17 दिन, वर्ष 2022 में 20 दिन, वर्ष 2023 में 22 दिन, वर्ष 2024 में 16 दिन और वर्ष 2025 में 20 दिन ही विधानसभा का सत्र चला था. जबकि प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के दिनों की संख्या आधिकारिक नियमों के अनुसार प्रति वर्ष कम से कम 90 दिन होनी चाहिए,

लेकिन वास्तविकता में यह संख्या काफी कम रही है. इस कारण से समाजवादी पार्टी का कहना है कि तीन दिनों तक होने वाले इस आयोजन में विधानसभा सत्र हर साल कम से कम 60 दिनों तक जरूर चले, इस पर भी विचार करना चाहिए.  

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