कौन हैं सम्राट चौधरी?, पिता शकुनी चौधरी रह चुके हैं मंत्री?, बिहार के नए खेवनहार?
By एस पी सिन्हा | Updated: April 14, 2026 16:39 IST2026-04-14T16:39:03+5:302026-04-14T16:39:55+5:30
शकुनी चौधरी अपने समय में नीतीश कुमार के अलावा लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी नेता माने जाते रहे हैं। 1990 में सक्रिय राजनीति में आने वाले सम्राट चौधरी 1995 में 89 दिनों के लिए जेल गए थे।

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पटनाः बिहार में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बन रही है और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। भाजपा विधायक दल की हुई बैठक में सम्राट चौधरी को फिर से विधायक दल का नेता चुन लिया गया। वहीं सम्राट चौधरी की यहां तक की यात्रा काफी दिलचस्प रही है। भाजपा में आने से पहले वे राजद अध्यक्ष लालू यादव की टीम के सिपाही हुआ करते थे। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कभी भाजपाई नहीं रहे, वे समता पार्टी का हिस्सा थे। इसके बावजूद सम्राट आज मोदी-शाह के सबसे भरोसेमंद नेताओं की सूची में शामिल हैं। सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर, 1968 को हुआ था।
#WATCH | Patna: Samrat Choudhary unanimously elected as the Leader of the BJP Legislative Party in Bihar. pic.twitter.com/Xd3reazFt4
— ANI (@ANI) April 14, 2026
सम्राट चौधरी भाजपा में उन नेताओं में शामिल हैं, जो आरएसएस बैकग्राउंड से नहीं आते हैं। यही कारण है कि भाजपा के कैडर बेस वाले नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है। भाजपा के अंदर कहीं न कहीं गुटबाजी की हलचल है? यह चर्चा है कि उनका पारंपरिक जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उतना गहरा नहीं रहा, पार्टी के कुछ वर्गों को असहज कर रही है।
लेकिन मोदी और शाह के आगे किसी भी नेता में उनका विरोध करने की हिम्मत नहीं दिख रही है। सम्राट चौधरी के पिता शुकनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं। शकुनी चौधरी अपने समय में नीतीश कुमार के अलावा लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी नेता माने जाते रहे हैं। 1990 में सक्रिय राजनीति में आने वाले सम्राट चौधरी 1995 में 89 दिनों के लिए जेल गए थे।
#WATCH | Patna: BJP's Central Observer for Bihar and Union Minister Shivraj Singh Chouhan, announces that Samrat Choudhary has been unanimously elected as the Leader of the BJP Legislative Party in Bihar. pic.twitter.com/mUFFIupMIV
— ANI (@ANI) April 14, 2026
बिहार विधान परिषद की साइट पर इस बात का जिक्र है। जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री रहते जब नीतीश कुमार से उनकी खटपट हुई थी तो सम्राट चौधरी ने राजद के कुछ विधायकों के साथ मांझी का साथ दिया था। सम्राट चौधरी जिस कुशवाहा समाज से आते हैं, बिहार में उसकी आबादी जातीय जनगणना, 2023 के अनुसार 4.2 प्रतिशत है।
सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार से सांसद विधायक और मंत्री रह चुके हैं। जबकि मां पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी थीं। अभी दो साल पहले उनका निधन हो गया। सम्राट चौधरी दो बार परबत्ता से विधायक रहे और दो बार विधान परिषद के सदस्य रहे। 2017 में भाजपा में शामिल हुए। इसी साल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए में शामिल हुए थे।
Patna | Samrat Choudhary was unanimously elected as the Leader of the BJP Legislative Party in Bihar, after Nitish Kumar resigned as Bihar CM
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BJP MP Rajiv Pratap Rudy says, "He has given his resignation. A good chapter is beginning in the history of Bihar. Handing over of power… pic.twitter.com/mc9Gh7zRZe
तब सम्राट चौधरी पंचायती राज मंत्री बने थे। 9 साल में ही सम्राट चौधरी भाजपा जैसी कैडर बेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं। अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने फिर से एनडीए का दामन छोड़ा था, तब भाजपा ने सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था। ओबीसी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी कुशवाहा यानी कोइरी समाज से ताल्लुक रखते हैं।
तेजतर्रार शैली, संगठन पर मजबूत पकड़ और आक्रामक राजनीतिक तेवर के कारण उन्हें मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे खड़ा कर दिया। उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी की यहां तक की यात्रा काफी दिलचस्प रही है। भाजपा में आने से पहले वे राजद अध्यक्ष लालू यादव की टीम के सिपाही हुआ करते थे। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कभी भाजपाई नहीं रहे, वे समता पार्टी का हिस्सा थे।
कभी राजद और फिर जदयू के सिपाही रहे सम्राट चौधरी आज भाजपा के उस ‘किंग’ की भूमिका में नजर आएंगे। सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कम उम्र में ही राबडी देवी सरकार में उन्हें 1999 में कृषि मंत्री बना दिया गया।
#WATCH | Patna: Samrat Choudhary unanimously elected as the Leader of the BJP Legislative Party in Bihar
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BJP's Central Observer for Bihar and Union Minister Shivraj Singh Chouhan says, "...This is an emotional moment. These are historic moments. Workers who have helped build the… pic.twitter.com/8vPLGkrGnl
उसवक्त भाजपा के विरोध के कारण राज्यपाल को उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करना पडा था। इसके बाद 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव लड़ा और जीता। 2010 में बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बनाए गए। इसके बाद 2 जून 2014 को जदयू कोटे से शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री पद की शपथ ली।
इसके बाद सम्राट चौधरी ने भाजपा का रास्ता चुना। राजद और जदयू में रहने के बाद सम्राट चौधरी का भाजपा में शामिल होना उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। वर्ष 2018 में भाजपा ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया। उन्होंने विधान परिषद में भी विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाई।
2023 के मार्च महीने में वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए, जो इस बात का संकेत था कि आलाकमान उन पर बड़ा दांव खेलने जा रहा है। फिर जनवरी 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद दोबारा 20 नवंबर 2025 को उन्होंने फिर से उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
बता दें कि भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में वह नीतीश कुमार के विरोधी नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे। हालांकि, बदलते समीकरणों के साथ वे आज नीतीश सरकार में ही उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभाते रहे हैं। नवंबर, 2025 में उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मिली।
इस तरह महज 9 साल में ही सम्राट चौधरी भाजपा जैसी कैडर बेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं। दरअसल, नीतीश कुमार नहीं चाहते कि उनके इस्तीफे के बाद उनके लव कुश समीकरण से कोई छेड़छाड़ किया जाए। सम्राट चौधरी इस समीकरण में बिल्कुल फिट बैठते हैं। ऐसे में नीतीश कुमार ने उनके नाम पर वीटो लगा दिया।