किसानों और कृषि के सामने कमजोर मानसून का जोखिम 

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: April 27, 2026 05:28 IST2026-04-27T05:28:28+5:302026-04-27T05:28:28+5:30

मौसम विभाग ने बारिश के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 92 प्रतिशत रहने की संभावना बताई है. यह पूर्वानुमान पांच फीसदी अधिक या कम की मॉडल त्रुटि के साथ जारी किया गया है.

Farmers and agriculture face risk weak monsoon blog Jayantilal Bhandari | किसानों और कृषि के सामने कमजोर मानसून का जोखिम 

सांकेतिक फोटो

Highlightsभारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है.यह पूर्वानुमान पिछले 26 वर्षों में मानसून का सबसे कम शुरुआती अनुमान है. देश में कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है.

हाल ही में विश्व बैंक के द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 में कमजोर मानसून से भारत में कृषि की पैदावार  और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. इससे महंगाई बढ़ने और विकास दर में कमी की चुनौती होगी. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों 13 अप्रैल को भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है.

यह पूर्वानुमान पिछले 26 वर्षों में मानसून का सबसे कम शुरुआती अनुमान है. इससे देश में कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है. मौसम विभाग ने बारिश के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 92 प्रतिशत रहने की संभावना बताई है. यह पूर्वानुमान पांच फीसदी अधिक या कम की मॉडल त्रुटि के साथ जारी किया गया है.

निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट की रिपोर्ट में भी इसी तरह का पूर्वानुमान जारी किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार देश में 75 प्रतिशत वर्षा पर आधारित मानसून सीजन (जून से सितंबर) में पांच प्रतिशत कम या ज्यादा के साथ 94 प्रतिशत वर्षा हो सकती है. यद्यपि पिछले आंकड़े बताते हैं कि सामान्य से कम मानसून वाले वर्षों में जब बारिश का समय, वितरण और फैलाव लगभग समान रहा तब खरीफ के उत्पादन में अधिक कमी नहीं हुई, किंतु गैर-सिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए जोखिम हो सकता है.

एक ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संघर्ष से महंगे उर्वरक, महंगे तेल और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से खेती की लागत बढ़ी है, तब कमजोर मानसून से न केवल किसानों और कृषि पर, वरन् आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर हो सकता है. साथ ही पेयजल समस्या की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं.

ऐसे में किसानों व कृषि क्षेत्र के समक्ष दिखाई दे रही आसन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए बहुआयामी रणनीति जरूरी है. इस वर्ष सामान्य से कम मानसून और खेती की बढ़ती लागत के मद्देनजर कई बातों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है. यद्यपि अभी निर्धारित गेहूं के निर्यात आदेशों की पूर्ति अवश्य की जाए, लेकिन आगामी निर्यात आदेशों की पूर्ति के लिए सजगता रखी जाए.

देश ने देखा है कि वर्ष 2021-22 में 70 लाख टन से अधिक गेहूं का निर्यात किया गया था, लेकिन वर्ष 2024 में गेहूं का आयात करना पड़ा. इस बात पर ध्यान देना होगा कि कम बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर गिरने से सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता प्रभावित होगी, ऐसे में अभी से जल संरक्षण के प्रयास शुरू होने चाहिए.

कृषि उत्पादन घटने की आशंका से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो सकती है. इस समय जो खुदरा महंगाई दर 3.40 प्रतिशत है, उसके बढ़ने की आशंका होगी. अतएव मूल्यों की रोकथाम की रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा. अब कृषि में प्रौद्योगिकी संस्कृति को बढ़ावा देने सहित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास पर जोर दिया जाना होगा.

व्यापक भंडारण अभियान और कृषि-वित्तीय प्रौद्योगिकी तथा आपूर्ति शृंखलाओं में नवाचार को बढ़ाने के प्रयास करने होंगे. चूंकि देश के विभिन्न हिस्सों में विविध जलवायु है और कृषि अनुकूल जलवायु क्षेत्रों के मामले में वह समृद्ध है, ऐसे में भारत को फसल विविधीकरण और खेती में आधुनिक तकनीक के एकीकरण के साथ आगे बढ़ना होगा.  

Web Title: Farmers and agriculture face risk weak monsoon blog Jayantilal Bhandari

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