खुफिया जांच के जरिये फर्जी बाबाओं पर कसें नकेल
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: April 27, 2026 05:32 IST2026-04-27T05:32:07+5:302026-04-27T05:32:07+5:30
करीब दस दिन पहले ही मुंबई पुलिस ने एक जिम ट्रेनर से तांत्रिक बने मोंटी बाबा उर्फ रिदम पंचाल को गिरफ्तार किया, जिस पर अनेक महिलाओं के यौन उत्पीड़न का आरोप है.

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कई महिलाओं के यौन शोषण तथा धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार ढोंगी बाबा अशोक खरात का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि इस तरह के ढेरों मामलों के खुलासे का मानो सिलसिला ही चालू हो गया है. ताजा मामला सोलापुर में फर्जी बाबा मनोहर भोसले उर्फ मनोहर मामा का है, जिसे पुलिस ने आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है.
उसके ऊपर पहले से ही आर्थिक धोखाधड़ी, ढोंग रचने और बलात्कार जैसे तीन गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें वह जमानत पर छूटा था. आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे फर्जी बाबा के 27 एकड़ में फैले आलीशान आश्रम में हर अमावस्या को बड़ी हस्तियों और नेताओं की भारी भीड़ जुटती थी, जिनमें राजनीतिक नेता, विधायक, सांसद, बड़े उद्यमी आदि शामिल होते थे.
अभी करीब दस दिन पहले ही मुंबई पुलिस ने एक जिम ट्रेनर से तांत्रिक बने मोंटी बाबा उर्फ रिदम पंचाल को गिरफ्तार किया, जिस पर अनेक महिलाओं के यौन उत्पीड़न का आरोप है. इसके अलावा भी ऐसे कई ढोंगी बाबाओं का भंडाफोड़ हुआ है, जिन्होंने लोगों को ठगकर अच्छी-खासी संपदा अर्जित की है और महिलाओं का यौन उत्पीड़न भी किया है.
विडंबना यह है कि ऐसे ढोंगी बाबाओं के यहां बड़े-बड़े नेताओं का आना-जाना होने से लोगों को लगता है कि जरूर वे कोई पहुंचे हुए संत होंगे, इसलिए उनके पास इतने नामी-गिरामी लोग आते हैं. उधर नेताओं को लगता है कि ऐसे बाबाओं से मेल-जोल रखने पर उन्हें बाबा के समर्थकों का वोट बैंक चुनावों के दौरान मिल जाएगा.
जिन ढोंगियों का भांडा फूट गया, उनके बारे में तो सब लोग जान जाते हैं और उन पर कार्रवाई भी होती है लेकिन क्या पता ऐसे न जाने कितने तथाकथित बाबा अभी भी आम जनता को ठगना जारी रखे हुए हों! दरअसल ऐसे ढोंगियों द्वारा धर्म की आड़ लेने से पुलिस भी उन पर जल्दी हाथ डालने से कतराती है कि मामला कहीं संवेदनशील रूप न धारण कर ले. इसलिए धर्म की आड़ में अनैतिक और आपराधिक कृत्यों को अंजाम देने वाले ढोंगी बाबाओं की सरकार को खुफिया एजेंसियों से जांच करानी चाहिए और पुख्ता सबूत मिलने पर उनका भंडाफोड़ करना चाहिए.
आखिर जब सरकार अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर नक्सलवाद का खात्मा कर सकती है, ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाकर देश को नशे से मुक्त करने के लिए कमर कस सकती है तो धर्म की आड़ लेकर उसे बदनाम करने वाले फर्जी बाबाओं पर नकेल क्यों नहीं कस सकती!