Ambedkar Jayanti April 14: महिलाओं को बनाना चाहते थे ‘नीति निर्माता’
By विशाला शर्मा | Updated: April 14, 2026 05:19 IST2026-04-14T05:19:25+5:302026-04-14T05:19:25+5:30
Ambedkar Jayanti April 14: भारत की हर शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला के पीछे बाबासाहब के उसी संघर्ष और दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब दिखाई देता है.

file photo
बाबासाहब डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने इस देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और समानता के अधिकारों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारा. ‘हिंदू कोड बिल’ के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के कानूनी और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं को न केवल मतदान का अधिकार मिले, बल्कि उन्हें समाज में पुरुषों के बराबर सम्मान और अवसर भी प्राप्त हों. आज भारत की हर शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला के पीछे बाबासाहब के उसी संघर्ष और दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब दिखाई देता है.
उन्होंने 1937 की ‘ऑल इंडिया वुमन कॉन्फ्रेंस’ में स्पष्ट कहा था कि ‘‘महिलाओं को मतदान का अधिकार होना चाहिए और विधायी निकायों में उनके लिए आरक्षण होना चाहिए’’. प्रधानमंत्री मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है.
यह डॉ. आंबेडकर द्वारा दशकों पहले देखे गए उस सपने का क्रियान्वयन है जिसमें महिलाएं ‘नीति निर्माता’ की भूमिका में हों.बाबासाहब का मुख्य लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जो जातिगत भेदभाव से मुक्त हो और जहां धर्मनिरपेक्षता का पालन किया जाए. उन्होंने कानून की नजर में प्रत्येक नागरिक के लिए समानता के अधिकार की वकालत की.
नारी शिक्षा समानता एवं देश की इस आधी आबादी के उत्थान के लिए उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और उन्हें पुरुषों के समान अधिकार देने पर बल दिया. उनका कथन था कि शिक्षा समाज में चेतना का संचार करती है और शिक्षित होकर ही सामाजिक व्यवस्था एवं संरचना में परिवर्तन लाया जा सकता है यही कारण रहा कि उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा को सर्वोपरि महत्व दिया और वंचित लोगों को शिक्षित करने का लक्ष्य अपने सम्मुख रखा.
वे अनिवार्य शिक्षा के भी हिमायती थे जितनी शिक्षा पुरुषों के लिए आवश्यक है उतनी ही महिलाओं के लिए भी अनिवार्य है, इसलिए स्त्री शिक्षा के वे सदैव पक्षधर रहे क्योंकि शिक्षा स्त्रियों को आत्मनिर्भर बनाएगी. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों के साथ समाज का पुनर्निर्माण और योग्य नागरिक बनाने की प्रथम सीढ़ी शिक्षा है.