Army Day 2026: शौर्य, तकनीक और संकल्प का संगम है सेना
By योगेश कुमार गोयल | Updated: January 15, 2026 05:53 IST2026-01-15T05:53:42+5:302026-01-15T05:53:42+5:30
Army Day Parade 2026: 15 जनवरी को मनाया जा रहा 78वां सेना दिवस सिर्फ एक औपचारिक सैन्य उत्सव नहीं बल्कि उस अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान का वंदन है, जिसने विपरीततम परिस्थितियों में भी भारत की सीमाओं की रक्षा की है.

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Army Day Parade 2026: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की सबसे सुदृढ़ ढाल है भारतीय थलसेना. यह केवल सीमाओं पर तैनात एक सैन्य शक्ति नहीं बल्कि राष्ट्र की चेतना, आत्मसम्मान और संकट की घड़ी में सबसे भरोसेमंद संबल भी है. जब-जब देश पर बाहरी आक्रमण, आंतरिक अशांति, आतंकवाद या प्राकृतिक आपदा का संकट आया है, भारतीय सेना ने बिना किसी भेदभाव के ‘स्वयं से पहले सेवा’ के आदर्श वाक्य को अपने आचरण में उतारते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है.
15 जनवरी को मनाया जा रहा 78वां सेना दिवस सिर्फ एक औपचारिक सैन्य उत्सव नहीं बल्कि उस अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान का वंदन है, जिसने विपरीततम परिस्थितियों में भी भारत की सीमाओं की रक्षा की है. भारतीय थलसेना की ऐतिहासिक यात्रा 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी की एक सैन्य टुकड़ी से आरंभ होकर आज विश्व की सबसे बड़ी और सबसे पेशेवर सेनाओं में शामिल होने तक पहुंची है.
राष्ट्र की स्वतंत्रता के बाद 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा द्वारा भारतीय सेना की कमान संभालना न केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन था बल्कि आत्मनिर्भर सैन्य नेतृत्व की शुरुआत भी थी. करिअप्पा का व्यक्तित्व अनुशासन, रणनीतिक दूरदृष्टि और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा.
1947-48 के युद्ध से लेकर सेना के संस्थागत निर्माण तक, उनके योगदान ने भारतीय सेना को एक सशक्त, पेशेवर और स्वाभिमानी स्वरूप प्रदान किया, जिसकी नींव पर आज की आधुनिक सेना खड़ी है. ‘ग्लोबल फायरपावर’ की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत है. यह रैंकिंग केवल सैनिकों की संख्या पर आधारित नहीं है बल्कि यह सैन्य संतुलन, आधुनिक हथियार प्रणालियों, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण, युद्ध अनुभव और तकनीकी क्षमता का समग्र आकलन है.
लगभग 14 लाख से अधिक सक्रिय सैनिकों के साथ भारतीय सेना न केवल विशाल है बल्कि रेगिस्तान, घने जंगल, हिमालयी ऊंचाइयां और समुद्र तटीय क्षेत्रों जैसी विविध भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन की अद्वितीय क्षमता भी रखती है. पिछले एक दशक में भारतीय थलसेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने नई गति पकड़ी है. ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को प्राथमिकता दी गई है.