भारतीय सेना के पराक्रम की गाथा है ऑपरेशन सिंदूर
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: May 9, 2026 07:03 IST2026-05-09T07:03:08+5:302026-05-09T07:03:08+5:30
इस ऑपरेशन के हिस्से के रूप में ही भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जो अभी भी जारी है और इससे भारत को पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाने में मदद मिली है.

भारतीय सेना के पराक्रम की गाथा है ऑपरेशन सिंदूर
सीमा पार पाकिस्तान में अपने अड्डे बनाकर भारत में आतंकी कार्रवाइयों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों और उनके ठिकानों को नष्ट करने के उद्देश्य से साल भर पहले भारतीय सेना ने जो ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, उसकी सफलता के आधिकारिक आंकड़े अब सामने आ गए हैं.
इस ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर गुरुवार को थल, वायु और नौसेना के शीर्ष अधिकारियों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि इसमें भारत के किसी भी सैन्य ढांचे या नागरिक सम्पत्ति को नुकसान नहीं हुआ था, बल्कि हमने पाकिस्तान के 13 विमानों को जमीन या हवा में ही मार गिराया था और सौ से अधिक आतंकियों के अलावा पाक के सौ जवान भी मारे गए थे.
इस ऑपरेशन की एक खास बात यह थी कि पूरे अभियान के दौरान 65 प्रतिशत स्वदेशी हथियारों से काम लिया गया, जिससे आत्मनिर्भर भारत की ताकत पता चली. निर्णायक कार्रवाई के बाद जब भारी नुकसान झेलने वाले पाकिस्तान ने संघर्षविराम की मांग की तब हमारे सैनिक पीछे हटे. पिछले साल सात मई को ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बड़ा हमला किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक तनाव और सैन्य गतिविधियां चली थीं.
भारत ने यह ऑपरेशन अप्रैल 2025 में पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए चलाया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस संघर्ष को रुकवाने का श्रेय लेते हुए भारत द्वारा अपने कई लड़ाकू विमानों को खोने का दावा किया था, जिसे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी समय खारिज किया था.
अब सैन्य अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी भारत के पुराने बयानों की ही पुष्टि हुई है और ट्रम्प का यह दावा खोखला साबित हुआ है कि उनके दखल देने के बाद यह संघर्ष रुका था. इस ऑपरेशन के पहले तक भारत द्वारा की जाने वाली किसी भी कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान परमाणु युद्ध की धमकी देते हुए अपने यहां आतंकवादियों को बेखौफ पालता-पोसता था, क्योंकि उसे लगता था कि परमाणु हमले के डर से भारत उसके ऊपर हमला नहीं करेगा. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने उसके इस भ्रम को तोड़ दिया.
पहले के संघर्षों के विपरीत, इस बार कई वैश्विक नेताओं ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन भी किया और यह ऑपरेशन भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति तथा आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता का प्रतीक बना. इस ऑपरेशन के हिस्से के रूप में ही भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जो अभी भी जारी है और इससे भारत को पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाने में मदद मिली है.