West Bengal Vidhan Sabha 2026: बंगाल में चुनाव पूर्व ही शुरू हुआ टकराव लंबा खिंचेगा!

By राजकुमार सिंह | Updated: January 17, 2026 05:46 IST2026-01-17T05:46:38+5:302026-01-17T05:46:38+5:30

West Bengal Vidhan Sabha 2026: समीक्षा करने पर भी सहमति जताई कि क्या राज्य सरकार की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध के मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं.

West Bengal Vidhan Sabha 2026 conflict that began before elections in West Bengal drag long time blog raj kumar singh | West Bengal Vidhan Sabha 2026: बंगाल में चुनाव पूर्व ही शुरू हुआ टकराव लंबा खिंचेगा!

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Highlightsसर्वोच्च न्यायालय ने ईडी के अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है.कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई स्थगन के लिए जिम्मेदार स्थितियों पर भी सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी की.कानूनी लड़ाई से बननेवाली जन धारणा फिलहाल ममता बनर्जी के अनुकूल नहीं लगती,

West Bengal Vidhan Sabha 2026:अब तक शह-मात में भाजपा पर भारी पड़ती रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस बार उनका दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है. सर्वोच्च न्यायालय की 15 जनवरी की टिप्पणियों से तो यही संकेत मिलता है. चर्चित केंद्रीय एजेंसी ईडी द्वारा आई-पैक के सह-संस्थापक एवं निदेशक प्रतीक जैन के घर-दफ्तर पर आठ जनवरी को मारे गए छापे और उसी दौरान वहां पहुंच कर कुछ दस्तावेज ले गईं ममता के विवाद की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी के अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है.

यही नहीं बल्कि इसकी समीक्षा करने पर भी सहमति जताई कि क्या राज्य सरकार की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध के मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं. इसी मामले में नौ जनवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई स्थगन के लिए जिम्मेदार स्थितियों पर भी सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी की.

ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सफाई दी कि वह वहां तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष की हैसियत से गई थीं, जिसकी आई-पैक राजनीतिक सलाहकार है. बेशक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस के जवाब में प. बंगाल सरकार अपनी बात और विस्तार से रखेगी, लेकिन इस लंबी चल सकनेवाली कानूनी लड़ाई से बननेवाली जन धारणा फिलहाल ममता बनर्जी के अनुकूल नहीं लगती,

जो अप्रैल-मई में संभावित विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का जनादेश पाना चाहती हैं. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच राजनीतिक कटुता लंबे समय से चरम पर है. शाब्दिक तल्खी के अलावा सड़क पर संघर्ष भी देखा जाता रहा है.

आई-पैक प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित राजनीतिक सलाहकार कंपनी (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) का संक्षिप्त नाम है, जो राजनीतिक दलों के लिए चुनाव रणनीति तैयार करने के लिए जानी जाती है. जन सुराज पार्टी बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़े प्रशांत किशोर के बाद प्रतीक जैन इसके प्रमुख हैं.

2014 में नरेंद्र मोदी से लेकर अब तक आई-पैक कई राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए चुनाव रणनीति तैयार करती रही है. उनमें से कुछ जबर्दस्त सफल रहीं तो कुछ नाकाम भी. आई-पैक अब तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव रणनीति तैयार कर रही है. ममता का आरोप है कि उनकी चुनावी रणनीति और तैयारियों पर डाका डालने के लिए केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने ईडी का छापा डलवाया.

ईडी और भाजपा का कहना है कि आई-पैक पर छापा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मारा गया, जिसमें बाधा डालते हुए ममता कुछ जरूरी दस्तावेज वहां से ले गईं. कमोबेश सभी विपक्षी दल और उनकी राज्य सरकारें केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाती रही हैं, लेकिन दिल्ली के बाद सीधा टकराव प. बंगाल में ही नजर आता है.

प. बंगाल का टकराव ज्यादा इसलिए चौंकाता है कि अतीत में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक दोस्ती भी रही है. वह उस दौर की बात है, जब ममता केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थीं और प. बंगाल में वाम मोर्चा का शासन था.  

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