नीदरलैंड पीएम रॉब जेटन दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत को क्यों ज्ञान दे रहे हैं?

By विकास मिश्रा | Updated: May 19, 2026 05:17 IST2026-05-19T05:17:05+5:302026-05-19T05:17:05+5:30

पीएम मोदी के नीदरलैंड पहुंचने से ठीक पहले जेटन ने एक डच अखबार से बातचीत करते हुए कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता ही मामला नहीं है बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का भी सवाल है.

Why Netherlands PM Rob Jetten giving advice India world's most populous country over 1-4 billion blog Vikas Mishra | नीदरलैंड पीएम रॉब जेटन दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत को क्यों ज्ञान दे रहे हैं?

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Highlightsयह भी कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं हुई?जेटन ने यह भी शंका जाहिर की कि क्या भारत अब भी समावेशी समाज बना हुआ है?मामला भारत के साथ हमेशा ही उठाया जाता रहा है.

यह कितनी बड़ी विडंबना है कि करीब 1 करोड़ 80 लाख की आबादी वाले देश नीदरलैंड का प्रधानमंत्री दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी (140 करोड़ से अधिक) वाले देश भारत को ज्ञान दे रहा है कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा  व्यवहार किया जाना चाहिए! और यह ज्ञान उसने तब दिया जब भारत के प्रधानमंत्री नीदरलैंड पहुंचने वाले थे! तो सवाल है कि भारत को परेशान करने वाला यह बयान पीएम रॉब जेटन की ओर से क्यों दिया गया? और यह भी कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं हुई?

मोदी के नीदरलैंड पहुंचने से ठीक पहले जेटन ने एक डच अखबार से बातचीत करते हुए कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता ही मामला नहीं है बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का भी सवाल है. यह मामला भारत के साथ हमेशा ही उठाया जाता रहा है. जेटन ने यह भी शंका जाहिर की कि क्या भारत अब भी समावेशी समाज बना हुआ है?

उनका आशय एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) जैसे संगठनों की रिपोर्ट्स से था. लेकिन क्या जेटन को पता नहीं है कि इस तरह रिपोर्ट कौन तैयार करता है और उसका लक्ष्य क्या होता है? क्या इसमें कोई चालाकी नजर नहीं आती कि प्रेस की आजादी के मामले में भारत को पाकिस्तान से भी पीछे रखा जाता है!

दरअसल इस तरह की रिपोर्ट के पीछे बड़ी राजनीति होती है और इसका राजनीतिक इस्तेमाल किया जाता है जैसा कि रॉब जेटन कर रहे हैं. रॉब जेटन की हरकतों को कुछ इस तरह समझने की कोशिश कीजिए. नीदरलैंड की आबादी में करीब 6 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है. ये मुसलमान ज्यादातर तुर्की और मोरक्को मूल के हैं लेकिन कुछ दूसरे देशों के भी हैं.

रॉब जेटन के इस तरह के बयान के पीछे महत्वपूर्ण राजनीति यह है कि वे अपने देश के मुसलमानों को साध सकें. संभवत: उन्हें ऐसा लग रहा है कि दुनिया भर के मुसलमानों की फिक्र करने से उनके देश के मुसलमान पूरी तरह से उनके साथ हो जाएंगे! लेकिन क्या ऐसा हो सकता है? इस सवाल की चिंता रॉब को करनी चाहिए. हमें उनकी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.

लेकिन रॉब जेटन को यह बताना जरूरी है कि उनके देश की जितनी कुल आबादी नहीं है, उससे दस-बारह गुना ज्यादा संख्या खांटी भारतीय मुसलमानों की है. उनके यहां मुसलमान अप्रवासी हैं और भारत में पूरी तरह भारतीय हैं. इसलिए उन्हें हमारी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. हजारों-हजार साल की सभ्यता वाले भारत को समावेशी विचार यूरोप से सीखने की जरूरत नहीं है.

हमारी सभ्यता और संस्कृति का मूल आधार ही समावेशी है. भारत जैसा उदाहरण दुनिया के किसी और देश में नहीं मिलता जहां इतने सारे धर्म एक साथ रहते हों और फल-फूल रहे हों. रॉब जेटन को शायद इस बात का अंदाजा नहीं है कि बंटवारे के वक्त  भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी 11 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है.

इसका कारण यह है कि हम भारत को टुकड़ों में बांट कर नहीं देखते. यहां कोई किस धर्म से है, किस विचार का समर्थक है या फिर उसकी निजी सोच क्या है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. यहां हर व्यक्ति भारतीय है. रॉब जेटन जैसे लोग अपनी राजनीति के लिए यदि इसमें खटास डालने की कोशिश करते हैं तो यह हमें कतई बर्दाश्त नहीं है.

यहां मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि ऐसे किसी भी बर्ताव का हमें सख्ती के साथ प्रतिकार करना चाहिए. इस संबंध में भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी बातें तब उठती हैं जब सामने वाले को भारत के बारे में ठीक जानकारी नहीं होती. इस तरह का बयान भारत की शालीनता का परिचायक हो सकता है लेकिन आज के दौर में देश ज्यादा तीखे जवाब की उम्मीद करता है.

रॉब को उनकी ही भाषा में कहा जाना चाहिए कि अपने काम से काम रखिए! हमें यह ज्ञान देने की कोशिश मत कीजिए कि हम कैसे रहें. भारतीय मुसलमानों की फिक्र आप मत कीजिए! इस मामले में मुझे असदुद्दीन ओवैसी के तेवर ज्यादा पसंद आते हैं. किसी पाकिस्तानी ने ओवैसी से भारतीय मुसलमानों को लेकर सवाल पूछ लिया था तो उन्होंने तीखे तेवर के साथ कहा कि आप अपनी चिंता कीजिए.

हमारी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. और जहां तक प्रेस की आजादी का सवाल है तो जेटन को इसके लिए भारत आने की जरूरत भी नहीं है. वे तो सोशल मीडिया पर जाकर ही देख सकते हैं कि भारत में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कितना रायता फैला हुआ है. जिसकी जो इच्छा होती है, वह बके जा रहा है.

इसमें कोई संदेह नहीं कि लोकतंत्र तभी सशक्त हो सकता है जब किसी भी देश में अभिव्यक्ति की भरपूर आजादी हो. पहले परंपरागत मीडिया ही अभिव्यक्ति का एकमात्र जरिया था लेकिन अब तो सोशल मीडिया के नाम पर ऐसी चिल्ल-पों मची है कि उसे संभालना किसी के बूते में नहीं है. अभिव्यक्ति अराजकता के रास्ते पर जा रही है.

तो क्या रॉब जेटन जैसे लोग यह चाहते हैं कि भारत में अभिव्यक्ति के नाम पर अराजकता फैले? मि. रॉब जेटन, आप औपनिवेशिक सोच वाले देश के पीएम हो. आप भारत की विशाल और शानदार संस्कृति को नहीं समझ सकते. हमारी खासियत है कि हम हर विचारधारा को खुद में घोल लेते हैं. यही हमारी ताकत है. भारत माता की गोद में रहने वाला हर व्यक्ति भारतीय है. यही हमारी पहचान  है. हमारी पहचान को टुकड़ों में बांटने की राजनीति मत कीजिए. टुकड़ों में बंटना हमें पसंद नहीं है.

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