बिहार औद्योगिक विकासः मुजफ्फरपुर और किशनगंज में सीमेंट कारखाना?, डालमिया-अंबुजा देंगे रफ्तार, हजारों नौकरी और अरबों निवेश?
By एस पी सिन्हा | Updated: May 16, 2026 15:31 IST2026-05-16T15:30:08+5:302026-05-16T15:31:41+5:30
Bihar Industrial Development: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों और बेहतर माहौल का परिणाम है कि देश की बड़ी कंपनियां बिहार में निवेश के लिए आगे आ रही हैं.

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पटनाः बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) की 67वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इस बैठक में सबसे बड़ी कामयाबी सीमेंट क्षेत्र में मिली है, जहां देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों डालमिया और अंबुजा सीमेंट को राज्य में अपनी बड़ी निर्माण इकाइयां (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) स्थापित करने की अंतिम स्वीकृति दे दी गई है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर खुद ट्वीट करके इस बड़े औद्योगिक निवेश की जानकारी दी.
सरकार के इस ऐतिहासिक कदम को बिहार के बदलते अध्याय के रूप में रेखांकित किया. बिहार राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर और सीमांचल के किशनगंज जिले में इन सीमेंट इकाइयों की स्थापना की जाएगी.
मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया और अंबुजा सीमेंट की बड़ी इकाइयों को स्वीकृति मिलने से राज्य के औद्योगिक भविष्य को नई मजबूती मिली है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस फैसले को बिहार के विकास का नया अध्याय बताते हुए कहा कि अब सीमांचल और उत्तर बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि बिहार अब तेजी से निवेशकों की पसंद बनता जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों और बेहतर माहौल का परिणाम है कि देश की बड़ी कंपनियां बिहार में निवेश के लिए आगे आ रही हैं. एसआईपीबी की बैठक में कुल 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस दिया गया, जबकि 4 परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी भी प्रदान की गई है.
उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, डालमिया भारत समूह और अडानी समूह के स्वामित्व वाली अंबुजा सीमेंट इन दोनों जिलों में अत्याधुनिक ग्राइंडिंग यूनिट्स और लॉजिस्टिक्स सेटअप तैयार करेंगी. इन दोनों बड़ी कंपनियों के आने से उत्तर बिहार और सीमांचल के जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को भारी रफ्तार मिलेगी.
इन परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन और अन्य ढांचागत सुविधाओं को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया है. इस उच्च स्तरीय बैठक में केवल सीमेंट प्लांट ही नहीं, बल्कि कुल 20 महत्वपूर्ण निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाया गया है. बोर्ड ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 16 नए निवेश प्रस्तावों को ‘स्टेज-1 क्लीयरेंस’ (प्रारंभिक मंजूरी) प्रदान की है.
इसके साथ ही, पूर्व से लंबित और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर चुकी 4 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को अंतिम ‘वित्तीय वित्तीय मंजूरी’ दे दी गई है. इन मंजूरियों के बाद राज्य में करोड़ों रुपये का सीधा पूंजी निवेश धरातल पर उतरेगा.इस निवेश का सबसे बड़ा और सकारात्मक असर सीमांचल और उत्तर बिहार के युवाओं पर पड़ने वाला है.
अब तक रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई और अन्य राज्यों की ओर पलायन करने वाले सीमांचल के युवाओं के लिए यह वरदान साबित होगा. उद्योगों के सीधे घर के द्वार तक आने से हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह निवेश बढ़ता रहा तो बिहार आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन सकता है. इससे राज्य में रोजगार, आय और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा.