बिहार विधान परिषद उपचुनावः उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को टिकट नहीं, बीजेपी के अरविंद शर्मा ने दाखिल किया नामांकन
By एस पी सिन्हा | Updated: April 30, 2026 16:38 IST2026-04-30T16:37:18+5:302026-04-30T16:38:36+5:30
Bihar Legislative Council by-election: भारतीय जनता (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरविंद शर्मा ने बृहस्पतिवार को विधान परिषद उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

Bihar Legislative Council by-election
पटनाः बिहार विधान परिषद उपचुनाव के लिए सूर्य कुमार शर्मा उर्फ़ अरविंद शर्मा ने गुरुवार को नामांकन दाखिल कर दिया। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। सूर्य कुमार शर्मा के द्वारा नामांकन दाखिल कर दिए जाने के बाद से रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद जाना तत्काल मुश्किल हो गया है। ऐसे में अभी संभावित मंत्रिमंडल के विस्तार में दीपक प्रकाश के मंत्री बनने पर संशय के बादल छा गए हैं। पिछली सरकार में बगैर किसी सदन का सदस्य रहे उपेंद्र कुशवाहा ने दीपक को मंत्री पद की शपथ दिलवा दी थी और वह पंचायती राज मंत्री बने थे। पहले यह चर्चा थी कि मंगल पांडेय के द्वारा खाली किए गए सीट से दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजा जायेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इधर सूर्य कुमार शर्मा के नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय समेत एनडीए के कई घटक दलों के नेता मौजूद रहे। इस मौके ने गठबंधन की मजबूत एकजुटता का संदेश दिया। अरविंद शर्मा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बेहद करीबी माने जाते हैं।
उन्हें उनके कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी भी दी गई थी। पार्टी में उनकी छवि एक कुशल, धैर्यवान और लक्ष्य आधारित नेता के रूप में रही है। वे कई वरिष्ठ नेताओं के साथ भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। एक दिन पहले ही भाजपा ने अरविंद शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया था। 30 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि निर्धारित होने के कारण उन्होंने अपना नामांकन किया।
चूंकि बिहार विधानसभा में संख्या बल सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के पक्ष में है। ऐसे में अरविंद शर्मा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। विपक्षी खेमे से अब तक किसी के नाम की घोषणा नहीं होने से इनका निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बिहार की सियासत में भूमिहार मतदाताओं की नाराजगी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भाजपा ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है।
विधान परिषद उपचुनाव 2026 हेतु एनडीए समर्थित भाजपा उम्मीदवार श्री सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) जी ने आज अपना नामांकन दाखिल किया।
— BJP Bihar (@BJP4Bihar) April 30, 2026
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री @samrat4bjp जी, माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री @sanjay_saraogi जी, द्वय उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चौधरी जी एवं… pic.twitter.com/Wv7sS00ev8
पार्टी ने बिहार विधान परिषद उपचुनाव में अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर अपने पारंपरिक वोटर माने जाने वाले भूमिहार वर्ग को साधने की कोशिश की है। दरअसल, यह सीट मंगल पांडेय के सीवान से विधायक चुने जाने के बाद खाली हुई थी। पांडेय ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी किसी ब्राह्मण चेहरे को ही उम्मीदवार बनाएगी।
लेकिन भाजपा ने इस बार समीकरण बदलते हुए भूमिहार समाज से आने वाले अरविंद शर्मा को मैदान में उतार दिया। बिहार में पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि भूमिहार समुदाय भाजपा से नाराज है। इसकी एक बड़ी वजह विजय कुमार सिन्हा से जुड़ा घटनाक्रम माना गया। जब मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी के नाम पर फैसला हुआ।
तब विजय सिन्हा ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उन्होंने “कमांडर के आदेश” का पालन करते हुए सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्तावक बनना स्वीकार किया। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में यह संदेश गया कि भूमिहार नेतृत्व को दरकिनार किया गया है, जिससे इस वर्ग में असंतोष पनपा।
बता दें कि बिहार में भूमिहार समुदाय की आबादी लगभग 3 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से यह वर्ग कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। खासकर मगध, शाहाबाद और कुछ उत्तर बिहार के इलाकों में इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
मौजूदा विधानसभा में भी भूमिहार समुदाय के कई विधायक विभिन्न दलों से आते हैं, जिनमें भाजपा की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस वर्ग की नाराज़गी किसी भी दल के लिए चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है। अरविंद शर्मा अरवल जिले के बंभई गांव के रहने वाले हैं और लंबे समय से पटना में सक्रिय हैं।
वह संगठन में जिलाध्यक्ष से लेकर कई जिलों के प्रभारी रह चुके हैं। जानकारों का मानना है कि अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने एक साथ दो संदेश देने की कोशिश की है पहला, संगठन के समर्पित नेताओं को आगे बढ़ाने का, और दूसरा, भूमिहार समुदाय को साधने का।