पत्नी का बच्चे के सामने गालीगलौज करना पति को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं?, बंबई हाईकोर्ट ने कहा- पारिवारिक जीवन में मतभेद सामान्य बात
By फहीम ख़ान | Updated: April 14, 2026 05:33 IST2026-04-14T05:32:32+5:302026-04-14T05:33:19+5:30
अदालत ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध सिद्ध करने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी का दुष्ट इरादा था .

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नागपुर: पत्नी द्वारा बच्चे के सामने अशोभनीय भाषा में गालीगलौज करना पति को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता. यह बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने एक मामले के निर्णय में स्पष्ट किया. न्यायालय ने कहा कि पारिवारिक जीवन और समाज में मतभेद व विवाद होना सामान्य बात है. ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा गुस्से या भावनाओं में कहे गए शब्दों के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं लगाया जा सकता.
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फलके ने यह निर्णय दिया. अदालत ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध सिद्ध करने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी का दुष्ट इरादा था और उसने अपने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यवहार तथा लगातार आचरण से संबंधित व्यक्ति के सामने आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा. अन्यथा, आरोपी को संबंधित व्यक्ति की मृत्यु के लिए जिम्मेदार ठहराना सामान्यतः संभव नहीं होता.
विवादित एफआईआर रद्द
अकोला जिले के तेल्हारा निवासी पटवारी शैलानंद तेलगोटे ने 30 मार्च 2025 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद पुलिस ने उनकी पत्नी प्रतिभा तेलगोटे और साले प्रवीण गायगोले के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. उच्च न्यायालय ने इस मामले में दर्ज अपराध और मुकदमे को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को यथावत मान भी लिया जाए, तब भी यह अपराध सिद्ध नहीं होता.
ये थे आरोप
आरोप था कि प्रतिभा ने शैलानंद को बच्चे के सामने अशोभनीय भाषा में गाली दी और 'फांसी लगाकर मर जाओ' कहकर उकसाया. वहीं, गायगोले ने शैलानंद से लिया गया उधार पैसा वापस नहीं किया था. शैलानंद ने यह पैसे सोसायटी से निकाले थे और उसकी कटौती वेतन से हो रही थी. इसी तनाव के चलते उसने आत्महत्या की. उसने आरोपियों के नाम एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था.