महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारियों पर क्या थोपी जा रही है हिंदी? राज्य कर्मचारियों के लिए नई परीक्षा अधिसूचना से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ

By रुस्तम राणा | Updated: May 6, 2026 15:52 IST2026-05-06T15:52:55+5:302026-05-06T15:52:55+5:30

राज्य के भाषा विभाग द्वारा घोषित इस फ़ैसले में, 28 जून 2026 को मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के डिविज़नल सेंटर्स पर, राजपत्रित और अराजपत्रित दोनों तरह के अधिकारियों के लिए हिंदी की परीक्षाएँ आयोजित करने का प्रस्ताव है।

Is Hindi Being Imposed on Maharashtra Government Employees? New Exam Notification for State Employees Sparks Political Controversy. | महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारियों पर क्या थोपी जा रही है हिंदी? राज्य कर्मचारियों के लिए नई परीक्षा अधिसूचना से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ

महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारियों पर क्या थोपी जा रही है हिंदी? राज्य कर्मचारियों के लिए नई परीक्षा अधिसूचना से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ

Highlightsशिवसेना (UBT) ने इस फ़ैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठायाविपक्षी दल ने कहा, जिस राज्य में मराठी राजभाषा है, वहाँ हिंदी को बढ़ावा देने के पीछे क्या तर्क हैपूछा, राज्य के कर्मचारियों पर हिंदी थोपने की इस कोशिश से आख़िर किसके हितों की पूर्ति हो रही है?

मुंबई:महाराष्ट्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा दक्षता परीक्षा आयोजित करने संबंधी हालिया अधिसूचना ने राज्य में भाषाओं की प्राथमिकताओं को लेकर एक नई राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस छेड़ दी है।

राज्य के भाषा विभाग द्वारा घोषित इस फ़ैसले में, 28 जून 2026 को मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के डिविज़नल सेंटर्स पर, राजपत्रित और अराजपत्रित दोनों तरह के अधिकारियों के लिए हिंदी की परीक्षाएँ आयोजित करने का प्रस्ताव है। हालाँकि, ख़बरों के मुताबिक़, ऐसी परीक्षाएँ पहले भी आयोजित की जाती रही हैं, लेकिन इस कदम की अब राजनीतिक दलों और भाषा कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की है।

'हिंदी थोपने' पर शिवसेना (UBT) की कड़ी प्रतिक्रिया

शिवसेना (UBT) ने इस फ़ैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठाया कि जिस राज्य में मराठी राजभाषा है, वहाँ हिंदी को बढ़ावा देने के पीछे क्या तर्क है। शिवसेना (UBT) ने पूछा, "राज्य के कर्मचारियों पर हिंदी थोपने की इस कोशिश से आख़िर किसके हितों की पूर्ति हो रही है?"

पार्टी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों पर हिंदी थोपना एक विरोधाभास को दर्शाता है, खासकर ऐसे समय में जब मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जा चुका है। उसने तर्क दिया कि महाराष्ट्र की पहचान मराठी भाषा और संस्कृति में निहित है।

आलोचनाओं को और बढ़ाते हुए, मराठी अभ्यास केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दीपक पवार ने यह सवाल उठाया कि क्या सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी को अनिवार्य बनाया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब प्रशासनिक कामकाज पहले से ही मराठी में होता है, तो कर्मचारियों की हिंदी दक्षता की जाँच करने का कोई खास औचित्य नहीं है।

पवार ने आगे यह भी बताया कि हिंदी न तो महाराष्ट्र की राजभाषा है और न ही राज्य के रोज़मर्रा के प्रशासनिक कामकाज के लिए इसकी कोई ज़रूरत है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात या पश्चिम बंगाल जैसे अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भी इसी तरह की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।

इस कदम को अनावश्यक बताते हुए, पवार ने आरोप लगाया कि यह मराठी भाषा को कमज़ोर करता है और प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी का कारण बनता है। उन्होंने मांग की कि सरकार प्रस्तावित परीक्षाओं को वापस ले और इस फैसले को रद्द करने का औपचारिक आदेश जारी करे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस फैसले पर दोबारा विचार नहीं किया गया, तो भाषा विभाग के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं

यह विवाद सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई राजनीतिक नेताओं को पोस्ट में टैग करके इस मामले पर स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। राज्य सरकार ने अभी तक इस पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया है, और आने वाले दिनों में इस बढ़ते विवाद पर उसका क्या रुख रहता है, इस पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

Web Title: Is Hindi Being Imposed on Maharashtra Government Employees? New Exam Notification for State Employees Sparks Political Controversy.

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