सरकारी जेके लोन अस्पतालः 22 वर्षीय प्रिया महावर की मौत और नवजात शिशु जीवित?, सिजेरियन प्रसव के बाद 4 महिलाओं में से 3 की हालत अब भी गंभीर

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 10, 2026 17:31 IST2026-05-10T17:30:32+5:302026-05-10T17:31:08+5:30

जेके लोन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला की मौत सिजेरियन प्रसव के बाद संक्रमण के कारण नहीं, बल्कि हृदय संबंधी जटिलताओं की वजह से हुई।

kota Government JK Lon Hospital 22-year-old Priya Mahawar dead newborn alive? 3 out of 4 women still in critical condition after caesarean delivery | सरकारी जेके लोन अस्पतालः 22 वर्षीय प्रिया महावर की मौत और नवजात शिशु जीवित?, सिजेरियन प्रसव के बाद 4 महिलाओं में से 3 की हालत अब भी गंभीर

सांकेतिक फोटो

Highlightsन्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।प्रिया महावर (22) के रूप में हुई है। उनका नवजात शिशु जीवित है और स्वस्थ बताया जा रहा है।डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने के लिए सिजेरियन प्रसव कराया। नवजात पूरी तरह स्वस्थ है।

कोटाः राजस्थान के कोटा में 22 वर्षीय एक महिला की सरकारी जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद कथित तौर पर उत्पन्न जटिलताओं के कारण मौत हो गयी जबकि दो अन्य महिलाओं में किडनी संबंधी दिक्कतें सामने आने के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, जेके लोन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला की मौत सिजेरियन प्रसव के बाद संक्रमण के कारण नहीं, बल्कि हृदय संबंधी जटिलताओं की वजह से हुई। मृतका की पहचान बूंदी जिले के सुनवासा गांव निवासी रोहित महावर की पत्नी प्रिया महावर (22) के रूप में हुई है। उनका नवजात शिशु जीवित है और स्वस्थ बताया जा रहा है।

जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि महिला का पहले स्थानीय स्तर पर एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा प्रसव पीड़ा के लिए उपचार किया गया था, जिसके बाद शनिवार को उसे अस्पताल रेफर किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘महिला की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने के लिए सिजेरियन प्रसव कराया। नवजात पूरी तरह स्वस्थ है।

हालांकि, मां को बाद में हृदय संबंधी जटिलताएं हो गईं और उन्हें पैरॉक्सिस्मल सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (पीएसवीटी) हुआ जिससे उनकी हृदय गति 200 धड़कन प्रति मिनट से अधिक हो गई।’’ शर्मा ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

दो अन्य महिलाओं, छावनी क्षेत्र की निवासी आरती (33) और पिंकी में अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद किडनी से जुड़ी जटिलताएं विकसित हो गयीं, जिनमें पेशाब रुकना भी शामिल है। दोनों को शनिवार को एनएमसीएच के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक स्थित नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती कराया गया।

डॉ. शर्मा ने कहा, ‘‘कोटा के अस्पतालों में इस समय जो स्थितियां सामने आ रही हैं, वे हमारी समझ से परे हैं और इसके वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत शोध की आवश्यकता है।’’ उन्होंने जनवरी में उदयपुर के एक अस्पताल में हुई ऐसी ही घटना का भी जिक्र किया और कहा कि उस मामले से सबक लिया गया होता तो शायद ऐसी जटिलताओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती थी।

इस बीच, शुक्रवार को एनएमसीएच के स्त्री रोग वार्ड में शिरीन (20) और किरण (26) संक्रमित हो गईं और उन्हें कथित तौर पर एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना पड़ा। वहीं, सोमवार शाम एनएमसीएच में सिजेरियन प्रसव के बाद जटिलताओं का सामना करने वाली चार महिलाओं में से तीन की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

Web Title: kota Government JK Lon Hospital 22-year-old Priya Mahawar dead newborn alive? 3 out of 4 women still in critical condition after caesarean delivery

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