सरायकेला-खरसावांः सिर्फ महिलाओं का मेला, बाबा गर्भेश्वर की पूजा करने से लड़कियों को मिलते हैं सुयोग्य वर?, मेल नहीं कर सकते प्रवेश

By एस पी सिन्हा | Updated: January 18, 2026 17:09 IST2026-01-18T17:08:45+5:302026-01-18T17:09:51+5:30

कई महिलाएं सुंदर माहौल के बीच खाना बनाते और खाते हुए दिखीं, जबकि कुछ घर का बना खाना लाई थीं। मेला में पहुंची महिलाओं ने शाकाहारी खाना खाया। यहां मांसाहारी भोजन करना प्रतिबंधित है।

Seraikela-Kharsawan fair exclusively women held Jharkhand Worshipping Baba Garbheshwar ensures that girls find suitable husband | सरायकेला-खरसावांः सिर्फ महिलाओं का मेला, बाबा गर्भेश्वर की पूजा करने से लड़कियों को मिलते हैं सुयोग्य वर?, मेल नहीं कर सकते प्रवेश

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Highlightsमहिलाएं पारंपरिक पिकनिक का आनंद लेती हैं।चट्टानों पर बैठकर अपने पसंदीदा पकवानों का मज़ा लिया। महिलाएं अलग-अलग ग्रुप में आई थीं।

रांचीः झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में एक ऐसी जगह है, जहां मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को एक अजब- गजब मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं हिस्सा लेती है। मेले में पुरुषों का इस मेले में आना सख्त मना है। कहा जाता है कि यहां स्थित बाबा गर्भेश्वर की पूजा करने से लड़कियों को सुयोग्य वर मिलते हैं। यह जगह सरायकेला-खरसावां में खरकाई नदी के बीच में स्थित मिर्गी चिगरा है, जहां महिलाओं का मेला लगता है। इस मेले में न सिर्फ झारखंड की बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी महिलाएं इस मेले में आती हैं। महिलाएं पारंपरिक पिकनिक का आनंद लेती हैं।

वे खरकाई नदी के बीच चट्टानों पर बैठकर अपने पसंदीदा पकवानों का मज़ा लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार महिलाएं अलग-अलग ग्रुप में आई थीं। कई महिलाएं सुंदर माहौल के बीच खाना बनाते और खाते हुए दिखीं, जबकि कुछ घर का बना खाना लाई थीं। मेला में पहुंची महिलाओं ने शाकाहारी खाना खाया। यहां मांसाहारी भोजन करना प्रतिबंधित है।

मेला में लगाए गए अधिकांश दुकानदार भी महिलाएं ही थीं। शनिवार को सुबह से शाम तक बच्चों के साथ महिलाओं का मिर्गी चिगड़ा में आना-जाना लगा रहा। मेला में अपने बच्चों के साथ जाकर पिकनिक मनाती हैं। दिन भर आनंद उठाते हुए शाम को घर वापस लौट जाती हैं। यहां पहुंची महिलाएं पहले नदी के बीचों बीच स्थित बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना की।

फिर मेला में घुमने के साथ साथ पारंपरिक भोजन का लुफ्त उठाया। बड़ी संख्या में बच्चे खरकई नदी के साफ पानी में डुबकी लगाते भी देखे गए। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। स्थानीय किंवदंती के अनुसार, महाभारत में पांडव पुत्र के अज्ञातवास के समय यहां पहुंचे थे और विश्राम किया था।

पत्थरों पर उभरे उनके पैरों के निशान आज भी दिखाई देते हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि महिला मेला में पुरुषों का प्रवेश हमेशा से प्रतिबंधित रहा है। हालांकि, वर्तमान में कुछ पुरुष भी मेला में दिखाई दे जाते हैं, लेकिन महिलाएं अभी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहती हैं। श्रद्धालु कन्या कुमारी साहू ने कहा कि ‘मिर्गी चिंगड़ा का मेला हमारी परंपरा से जुड़ा हुआ है।

पहले यहां हम बचपन से आते हैं। पहले बाबा की पूजा करते हैं और फिर पिकनिक का आनंद लेते हैं।’ वहीं, कल्पना दास का कहना है कि यह मेला हमारी ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है और ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने की जरूरत है। स्थानीय महिलाएं मानती हैं कि बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर प्राप्त होता है। यह मेला राज राजवाड़े के समय से चला आ रहा है। 

Web Title: Seraikela-Kharsawan fair exclusively women held Jharkhand Worshipping Baba Garbheshwar ensures that girls find suitable husband

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