यह केवल सामान्य सी धूर्तता नहीं बल्कि राष्ट्रद्रोह है!
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: May 8, 2026 07:01 IST2026-05-08T07:01:34+5:302026-05-08T07:01:34+5:30
अब सवाल यह उठता है कि क्या जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार की गई या फिर लापरवाही बरती गई? दोनों ही मामलों में अधिकारी दोषी हैं. यदि सामान्य तौर पर देखें तो यह मामला पूरी तरह से घालमेल का है. हो सकता है कि राशि इतनी बड़ी न हो लेकिन जो मंशा है, वह सरकारी योजना में ठगी की है.

यह केवल सामान्य सी धूर्तता नहीं बल्कि राष्ट्रद्रोह है!
यह खबर वाकई चौंकाने वाली है कि कुछ ऐसे लोगों ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अनुदान हासिल किया जिसके वे हकदार नहीं थे. उन्होंने बिजली कनेक्शन को घरेलू उपयोग का बताया जिससे कि उन्हें अनुदान प्राप्त हो गया और कुछ दिनों बाद अपने कनेक्शन को वाणिज्यिक कनेक्शन के रूप में तब्दील कर लिया.
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना पूरी तरह से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है, यह सबको पता है. इसका मतलब है कि जिन लोगों ने कनेक्शन को वाणिज्यिक कनेक्शन के रूप में तब्दील कराया, उन्हें पता था कि वे गलत कर रहे हैं. इसके साथ ही जिन अधिकारियों ने कनेक्शन परिवर्तन की रिपोर्ट तैयार की होगी, उन्होंने यदि सजगत से जांच-पड़ताल की होती तो उन्हें भी पता होता कि मामला गड़बड़ है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार की गई या फिर लापरवाही बरती गई? दोनों ही मामलों में अधिकारी दोषी हैं. यदि सामान्य तौर पर देखें तो यह मामला पूरी तरह से घालमेल का है. हो सकता है कि राशि इतनी बड़ी न हो लेकिन जो मंशा है, वह सरकारी योजना में ठगी की है.
सरकारी योजना में ठगी क्या देशद्रोह नहीं है? निश्चित रूप से है. इस तरह के प्रकरण विभिन्न योजनाओं में पहले भी सामने आते रहे हैं. हद तो तब हो गई जब महिलाओं के नाम पर कई जगह पुरुषों ने भी महाराष्ट्र में योजनाओं का लाभ ले लिया. ऐसे मामलों में जांच-पड़ताल के बाद सरकार अपनी पीठ थपथपाती है कि उसने घोटाला पकड़ लिया है और अपात्र लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं.
मगर सवाल यह नहीं है कि आपने अपात्रों के नाम सूची से हटा दिए, सवाल यह है कि इन अपात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? और दूसरा प्रमुख सवाल है कि अपात्रों को सूची में जगह कैसे मिली? किसी भी सरकारी योजना में नियम बहुत स्पष्ट होते हैं. यदि नियमों के अनुरूप काम हो तो किसी अपात्र के सूची में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता!
घोटाले होते हैं तो इसका मतलब बहुत साफ है कि इसमें अधिकारियों की भी मिलीभगत है. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में हुए घोटाले की पूरे प्रदेश में अच्छी तरह जांच हो और दोषियों को कठघरे में खड़ा किया जाए. अभी तो केवल नागपुर के मामले सामने आए हैं. पूरे प्रदेश में जांच होगी तभी पता चल पाएगा कि घोटाले का स्वरूप कितना बड़ा है.