गर्म हवा के गुंबद से बढ़ता धरती का तापमान
By प्रमोद भार्गव | Updated: April 25, 2026 05:38 IST2026-04-25T05:38:52+5:302026-04-25T05:38:52+5:30
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में गर्मी एकाएक बढ़ गई है.

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देश के कई राज्यों में वायुमंडल में अंगड़ाई ले रही गर्म हवाओं ने अप्रैल माह में ही तापमान 40 डिग्री के पार पहुंचा दिया है. मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार इसका मुख्य कारण केवल सामान्य मौसमी बदलाव न होकर ऊष्मा का बन जाने वाला वह छतरीेनुमा गोला है, जो आधे भारत के राज्यों में मंडरा रहा है.
इस समय दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में गर्मी एकाएक बढ़ गई है. इस प्राकृतिक स्थिति को ऊष्मा का छत्र (हीट डोम) या गुंबद कहा जा रहा है. यह छत्र तब बनता है, जब वायुमंडल में उच्च दबाव की एक प्रणाली लंबे समय तक किसी एक क्षेत्र में ठहर जाती है.
दरअसल यह एक बर्तन के ढक्कन की तरह गर्म हवा को नीचे धरती की तरफ दबाए रखती है, जो तेज गर्मी का कारण बन जाती है. नतीजतन ऐसे क्षेत्रों में तापमान खतरनाक ढंग से बढ़ जाता है और कई दिनों या हफ्तों तक भीषण गर्मी या लू बनी रहती है. भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान ने इस संकट के और बढ़ने के संकेत दिए हैं.
अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के ज्यादातर हिस्सों में भीषण लू के रूप में गर्म हवाएं चलने की आशंका है. इस बार गर्मी का मिजाज इसलिए भी अलग है, क्योंकि कई तटीय इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में नमी वाली गर्मी यानी उमस का असर भी देखने में आ रहा है. इससे लू लगने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है.
आजकल आधे भारत में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है, जो लोगों को पस्त कर रहा है. हालांकि लू और प्रचंड गर्मी के बीच भी एक अंतर होता है. गर्मी के मौसम में ऐसे क्षेत्र जहां तापमान, औसत तापमान से कहीं ज्यादा हो और पांच दिन तक यही स्थिति यथावत बनी रहे तो इसे ‘लू’ यानी गर्मी का गोला कहने लगते हैं.
मौसम की इस असहनीय विलक्षण दशा में नमी भी समाहित हो जाती है. यही सर्द-गर्म थपेड़े लू की पीड़ा और रोग का कारण बन जाते हैं. किसी भी क्षेत्र का औसत तापमान किस मौसम में कितना होगा, इसकी गणना एवं मूल्यांकन पिछले 30 साल के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है. वायुमंडल में गर्म हवाएं आमतौर से क्षेत्र विशेष में अधिक दबाव की वजह से उत्पन्न होती हैं.
हवाएं गर्म होने का प्रमुख कारण ऋतुचक्र का उलटफेर और भूतापीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) का औसत से ज्यादा बढ़ना है. इसीलिए वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि इस बार प्रलय धरती से नहीं, आकाशीय गर्मी से आएगी. संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2020 में किए गए एक अध्ययन से स्पष्ट हुआ था कि जलवायु परिवर्तन और पानी का अटूट संबंध है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया को 2030 तक बाढ़ों की कीमत प्रत्येक वर्ष चुकानी पड़ेगी. इनसे करीब सालाना 15.6 लाख करोड़ की हानि उठानी पड़ सकती है. साफ है कि वैश्विक तापमान के बढ़ते खतरे ने आम आदमी के दरवाजे पर दस्तक दे दी है.