युद्ध विराम पर ईमानदारी बनी रहे

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 20, 2026 07:16 IST2026-04-20T07:15:26+5:302026-04-20T07:16:08+5:30

इस बीच, युद्ध विराम की अपनी-अपनी घोषणाओं के बाद ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को खोलने की बात साफ हो गई थी.

Maintain integrity on the ceasefire | युद्ध विराम पर ईमानदारी बनी रहे

युद्ध विराम पर ईमानदारी बनी रहे

करीब दो माह पहले इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच आरंभ हुआ युद्ध शायद दुनिया का पहला ऐसा संघर्ष कहा जाएगा, जिसमें बड़े देशों की उपस्थिति के बावजूद युद्ध के कई नियम-कायदों को ताक पर रखकर कार्रवाइयां की गईं. कहीं भी बम गिरे और किसी को भी मारा गया. आश्चर्यजनक यह है कि अभी तक युद्ध आरंभ के कारण और समाप्ति का समझौता दुनिया की समझ में आना बाकी है. यूं तो दुनिया इजराइल की ईरान से ही नहीं, बल्कि उसके सभी पड़ोसी देशों से स्थायी दुश्मनी जानती है. उनके बीच हमलों का सिलसिला सालों-साल से चला आ रहा है.

अब उसमें दुनिया की महाशक्ति कहा जाने वाला अमेरिका बिना सोचे-समझे कूद पड़ा है. लड़ाई रुकने पर उसने कथित रूप से पाकिस्तान में ईरान के साथ बातचीत की है, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला है. अब अगले दौर की वार्ता होने के आसार हैं. इस पूरे घटनाक्रम में भारत सहित दुनिया के अनेक देश पिस रहे हैं. चूंकि किसी कानून, संस्था अथवा देश की सुनी नहीं जा रही, इसलिए ‘हम करें, सो कायदा’ की नीति चल रही है.

इस बीच, युद्ध विराम की अपनी-अपनी घोषणाओं के बाद ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को खोलने की बात साफ हो गई थी. किंतु बीते शनिवार को भारत के झंडे लगे दो जहाजों को गोलीबारी के चलते अपना रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा. जिस पर आपत्ति जताई गई, जबकि भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने घटना के प्रति अनभिज्ञता व्यक्त की.

गोलीबारी के दौरान ईरानी नौसेना ने ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के पश्चिम में सफर के दौरान दो भारतीय जहाजों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया. हालांकि जहाजों के बारे में मिली जानकारी में उनके भीतर ईरान का ही तेल बताया गया. यदि ईरान अपने देश से निकले और भारत जा रहे जहाज पर हमला करता है तो उसका अपना कहीं न कहीं आपसी तालमेल में अभाव का मामला बनता है. दूसरी ओर लड़ाई रुकने के बाद मध्य-पूर्व एशिया के अनेक देशों में युद्ध में विजय का जश्न मनाया जा रहा है. अमेरिका के पहले ही अपने अलग दावे हैं.

इस स्थिति में कौन जीता और कौन हारा, समझ में आना असंभव है. दुनिया ने इस संघर्ष को अहंकार के चलते आई एक मुसीबत के रूप में देखा. अब जैसे ही संकट के दूर होने के संकेत मिले, वैसे ही दुनिया ने राहत की सांस ली. मगर भारतीय के अलावा भी कुछ जहाजों पर हुए हमलों के बाद युद्ध समाप्ति की स्थिति स्पष्ट नहीं होती है. यद्यपि ईरान ने अपने संघर्ष में भारत के प्रति नरम और दोस्त जैसा रवैया बनाए रखा.

फिर भी जहाजों पर हमले चिंताजनक हैं. युद्ध ने अनेक देशों को काफी पीछे धकेल दिया है. यदि शांति की घोषणाओं के बीच गोलीबारी चलती रहेगी तो व्यापारिक क्षेत्रों में विश्वास पैदा नहीं होगा और उसका नुकसान किसी एक को नहीं, बल्कि अनेक देशों को होगा. इसलिए घोषणाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए उन पर ईमानदारी दिखाने की भी आवश्यकता है.

Web Title: Maintain integrity on the ceasefire

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