100000 रोजगार, 2.56 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 18 बड़ी परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने लगाई मुहर

By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 22, 2026 19:39 IST2026-04-22T19:37:35+5:302026-04-22T19:39:24+5:30

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

mumbai 100,000 jobs, investment of Rs 2-56 lakh crore special incentives 18 big projects? CM Devendra Fadnavis approves | 100000 रोजगार, 2.56 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 18 बड़ी परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने लगाई मुहर

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Highlightsबैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।कैबिनेट ने महाराष्ट्र राज्य संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) नीति, 2026 को मंजूरी दी।ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।

मुंबई:महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को 18 बड़ी और अति वृहद परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन को मंजूरी दी। इसमें कुल 2.56 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इनसे राज्य में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। फडणवीस की अध्यक्षता में उद्योग, ऊर्जा, श्रम और खनन पर मंत्रिमंडल की उप-समिति की 14वीं बैठक के दौरान ये मंजूरियां दी गईं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा निर्णयों का संक्षिप्त विवरण जारी किया गया है, जबकि विस्तृत घोषणाएं बाद में होने की उम्मीद है। कैबिनेट ने महाराष्ट्र राज्य संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) नीति, 2026 को मंजूरी दी।

इस नीति के तहत महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में समन्वय समितियां गठित की जाएंगी और बायोगैस परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और हाइब्रिड वार्षिकी आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा। चालू वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस नीति का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।

शिक्षा क्षेत्र में सरकार ने सात मॉडल कॉलेजों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार मूल वेतन देने का निर्णय लिया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत पदों की भर्ती में इन शिक्षकों को अतिरिक्त प्राथमिकता दी जाएगी।

राज्य मंत्रिमंडल ने सतारा जिले के नागेवाड़ी में आईटी पार्क के विकास के लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) को 42.55 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना से क्षेत्र में आईटी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और रोजगार एवं व्यावसायिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

एक अन्य निर्णय भूमि स्वामित्व की अधिकतम सीमा के नियमों के अनुसार द्वितीय श्रेणी से प्रथम श्रेणी में रूपांतरण के लिए प्रीमियम के पुनर्गठन से संबंधित है। इस संबंध में अधिसूचना जारी करने की मंजूरी दे दी गई है। प्रत्येक जिले में एक समन्वय समिति का गठन किया जाएगा और बायोगैस परियोजनाओं को पीपीपी और हाइब्रिड वार्षिकी आधार पर लागू किया जाएगा।

इस वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे ठोस कचरे का पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन संभव होगा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। राज्य के सात मॉडल कॉलेजों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार मूल वेतन मिलेगा।

इन पदों पर कार्यरत शिक्षकों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत पदों की भर्ती में अतिरिक्त अंक भी दिए जाएंगे। सतारा जिले के नागेवाड़ी में आईटी पार्क के लिए भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम को कुल 42.55 हेक्टेयर भूमि आवंटित की जाएगी।

इस कदम से सतारा और आसपास के क्षेत्रों में आईटी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और युवाओं के लिए रोजगार और व्यावसायिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है। (राजस्व विभाग) राज्य के अधिकतम भूमि स्वामित्व सीमा नियमों के अनुसार द्वितीय श्रेणी अधिभोगी से प्रथम श्रेणी अधिभोगी में रूपांतरण के लिए प्रीमियम के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी गई है।

इस संबंध में अधिसूचना जारी करने की भी अनुमति दे दी गई है। (राजस्व विभाग) केईएम अस्पताल का नाम बदलने का प्रस्ताव: भाजपा विधायक और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को पत्र लिखकर किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल का नाम बदलने का अनुरोध किया है।

उन्होंने इसका नाम "कौशल्य श्रेष्ठ एकलव्य स्मारक अस्पताल" रखने का प्रस्ताव दिया है। लोढ़ा ने दूसरी बार यह मांग उठाई है। यह प्रस्ताव विवाद का विषय बन सकता है, क्योंकि अतीत में इसी तरह के सुझावों पर विवाद हो चुका है। लोढ़ा का तर्क है कि अस्पताल का वर्तमान नाम ब्रिटिश काल से है और इसे बदला जाना चाहिए।

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