बस्ती में दलालों ने बना दिया 4500 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस?, हर काम पर वसूले 20000 रुपये?
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 27, 2026 18:26 IST2026-04-27T18:24:47+5:302026-04-27T18:26:09+5:30
विभागीय अफसरों की मिलीभगत से दलालों ने मिर्जापुर, संत कबीर नगर, पडरौना, गोरखपुर और आसपास के जिलों के आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बस्ती से बनवा दिए हैं.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है. इसके बाद भी राज्य में हर दिन भ्रष्टाचार को कोई न कोई ऐसा बड़ा मामला सामने आ रहा है. भ्रष्टाचार के ऐसे प्रकरणों में विभाग के अधिकारियों की मिली मिलीभगत के सबूत भी सामने आए हैं.
ऐसा ही ताजा मामला बस्ती जिले में दलालों द्वारा 4,500 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने का पकड़ा गया है. हर लाइसेंस बनाने में दस से बीस हजार रुपए वसूले गए. बताया जा रहा है कि दलालों ने ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए फर्जी तरीके से आवेदकों की बैकलॉग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवाकर बस्ती में लाइसेंस बनवाए हैं.
यहीं नहीं विभागीय अफसरों की मिलीभगत से दलालों ने मिर्जापुर, संत कबीर नगर, पडरौना, गोरखपुर और आसपास के जिलों के आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बस्ती से बनवा दिए हैं. अब इस घोटाले के सामने आने पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने उच्चाधिकारियों को जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिया है.
अरुणाचल के सेप्पा और सियांग से हुई बैकलॉग एंट्री
परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार, बस्ती जिले में दलाओं की मिलीभगत से मिर्जापुर, संतकबीर नगर, पडरौना, गोरखपुर और आसपास के जिलों में रहने वाले लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए फर्जी तरीके से बनाए जाने के सबूत मिले हैं. पता चला है कि मिर्जापुर के आरटीओ में बना रामतीरथ मौर्य के ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री सेप्पा(अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में करवाई और बस्ती में वर्ष 2026 में एड्रेस चेंज की रसीद काटकर डीएल बनाया गया.
इसी प्रकार पडरौना के मनीष यादव का ड्राइविंग लाइसेंस नंबर यूपी 57 20170098799 की भी बैकलॉग एंट्री सेप्पा से 2017 में हुई और बस्ती में इसे रिन्यूवल कराया गया. इसके अलावा करण गुप्ता के ड्राइविंग लाइसेंस नंबर यूपी 51- 20200018137 की बैकलॉग एंट्री सियांग(अरुणाचल प्रदेश) से हुई और बस्ती से इसका रिन्यूवल करवाया गया.
इसके अलावा भी हजारों की संख्या में फर्जी तरह से ड्राइविंग लाइसेंस बस्ती से बनवाए गए. विभागीय अफसरों की मिलीभगत से हुए इस खेल में दलालों ने अफसरों की शह पर फर्जी तरीके से डीएल बनवाकर आवेदकों से मोटी रकम वसूली है.
अब तक की हुई जांच से यह भी पता चला है कि इन आवेदकों का लर्नर लाइसेंस नहीं बनवाया गया और नियमों को ताक पर रखकर सीधे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए गए हैं. फिलहाल अब इस मामले में उच्चाधिकारी जांच कर जल्दी ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे. परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह का यह कहना है.
डीएल बनाने की प्रक्रिया की हुई खूब अंबदेखी
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक को पहले लर्नर लाइसेंस बनवाना होता है. इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन है. आवेदक को आरटीओ जाने की आवश्यकता नहीं होती है. ऑनलाइन आवेदन कर टेस्ट देने के बाद यह बन जाता है. लर्नर बनने के एक महीने बाद से लेकर छह महीने के बीच परमानेंट डीएल बनता है.
इसमें आरटीओ जाकर बायोमेट्रिक और वाहन टेस्ट पास करना पड़ता है. इसके बाद हफ्ते से दो हफ्ते के अंदर डाक से डीएल घर पहुंचता है. हेवी लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक के पास एक साल पुराना डीएल होना जरूरी है.
इस स्पष्ट नियम के बाद भी बस्ती के आरटीओ आफिस में पडरौना, मिर्जापुर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर या कई अन्य जिलों के ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा और सियांग से करवाने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस में पता बदलने या रिन्यूअल का आवेदन बस्ती से करवाकर लाइसेंस बनवा दिया जाता है.
इसके एवज में आवेदक से मोटी रकम वसूली गई है. आरटीओ बस्ती में हुए इस घोटाले की सामने आने के बाद यहां तैनात आरटीओ, आरआई और एआरटीओ से जल्दी ही पूछताछ की जाएगी ताकि इस घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.